अबो॑ध्य॒ग्निः स॒मिधा॒ जना॑नां॒ प्रति॑ धे॒नुमि॑वाय॒तीमु॒षास॑म्। य॒ह्वाइ॑व॒ प्र व॒यामु॒ज्जिहा॑नाः॒ प्र भा॒नवः॑ सिस्रते॒ नाक॒मच्छ॑ ॥१॥
abodhy agniḥ samidhā janānām prati dhenum ivāyatīm uṣāsam | yahvā iva pra vayām ujjihānāḥ pra bhānavaḥ sisrate nākam accha ||
अबो॑धि। अ॒ग्निः। स॒म्ऽइधा॑। जना॑नाम्। प्रति॑। धे॒नुम्ऽइ॑व। आ॒ऽय॒तीम्। उ॒षास॑म्। य॒ह्वाःऽइ॑व। प्र। व॒याम्। उ॒त्ऽजिहा॑नाः। प्र। भा॒नवः॑। सि॒स्र॒ते॒। नाक॑म्। अच्छ॑ ॥१॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
अब बारह ऋचावाले प्रथम सूक्त का आरम्भ है, उसके प्रथम मन्त्र में उपदेश देने योग्य और उपदेश देनेवाले के गुणों को कहते हैं ॥१॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
जीवन-यात्रा का सुन्दर अन्त
स्वामी दयानन्द सरस्वती
अथोपदेश्योपदेशकगुणानाह ॥
हे विद्वन्! यथा समिधाग्निरबोधि भानवो जनानामायतीं धेनुमिवोषासं प्रति प्र सिस्रते वयां प्रोज्जिहाना यह्वा इव नाकमच्छ सिस्रते तथा त्वं भव ॥१॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
The attributes of the preachers and audience are told.
O learned person! the fire (of Yajna) is enkindled with fuel, medicated and fragrant herbs ghee etc., as the rays of the sun go early in the morning to the coming dawn like the milch cow, and they go to the firmament like the big tress shooting up and leaving behind their branches. Same way, you should also be.
माता सविता जोशी
(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)या सूक्तात उपदेश ऐकणारे व उपदेश ऐकविणारे यांच्या गुणांचे वर्णन केल्याने या सूक्ताच्या अर्थाची या पूर्वीच्या सूक्ताच्या अर्थाबरोबर संगती जाणावी.
