तु॒ञ्जेतु॑ञ्जे॒ य उत्त॑रे॒ स्तोमा॒ इन्द्र॑स्य व॒ज्रिणः॑। न वि॑न्धे अस्य सुष्टु॒तिम्॥
tuñje-tuñje ya uttare stomā indrasya vajriṇaḥ | na vindhe asya suṣṭutim ||
तु॒ञ्जेऽतु॑ञ्जे। ये। उत्ऽत॑रे। स्तोमाः॑। इन्द्र॑स्य। व॒ज्रिणः॑। न। वि॒न्धे॒। अ॒स्य॒। सु॒ऽस्तु॒तिम्॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
अगले मन्त्र में इन्द्र शब्द से परमेश्वर का प्रकाश किया है-
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
अनन्त दान - सान्त स्तवन
स्वामी दयानन्द सरस्वती
इन्द्रशब्देनेश्वर उपदिश्यते।
नाहं ये तुञ्जेतुञ्जे उत्तरे स्तोमाः सन्ति तैर्वज्रिण इन्द्रस्य परमेश्वरस्य सुष्टुतिं विन्धे विन्दामि॥७॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
On the receipt of every gift from the Lord of the Universe Who is Almighty, praises rise in me. I go on singing the glory of God, but I don't find an end to it. I find no laud worthy of Him.
