Go To Mantra

उप॑ प्रि॒यं पनि॑प्नतं॒ युवा॑नमाहुती॒वृध॑म् । अग॑न्म॒ बिभ्र॑तो॒ नम॑: ॥

English Transliteration

upa priyam panipnataṁ yuvānam āhutīvṛdham | aganma bibhrato namaḥ ||

Mantra Audio
Pad Path

उप॑ । प्रि॒यम् । पनि॑प्नतम् । युवा॑नम् । आ॒हु॒ति॒ऽवृध॑म् । अग॑न्म । बिभ्र॑तः । नमः॑ ॥ ९.६७.२९

Rigveda » Mandal:9» Sukta:67» Mantra:29 | Ashtak:7» Adhyay:2» Varga:18» Mantra:4 | Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:29


Reads 351 times

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (प्रियं) सबको प्रसन्न करनेवाले (पनिप्नतं) वेदादि शब्दराशि के आविर्भावक (युवानं) सदा एकरस (आहुतीवृधं) जो अपनी प्रकृतिरूपी आहुति से बृहत् है, उक्त गुणसम्पन्न परमात्मा को (नमः) नम्रतादि भावों को (बिभ्रतः) धारण करते हुए हम लोग (उपागन्म) प्राप्त हों ॥२९॥
Connotation: - इस मन्त्र में परमात्मा नम्रतादि भावों का उपदेश करता है कि हे मनुष्यों ! नम्रतादि भावों को धारण करते हुए उक्त प्रकार की प्रार्थनाओं से मुझको प्राप्त हो ॥२९॥
Reads 351 times

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

प्रभु के समीप उपस्थित होना

Word-Meaning: - [१] गतमन्त्र में वर्णित सोम के रक्षण के लिये (नमः बिभ्रतः) = नमन को धारण करते हुए हम (उप अगन्म) = समीपता से, उपासक के रूप में प्राप्त हों । सदा प्रातः सायं मन में नम्रता को धारण करते हुए प्रभु की उपासना करें। यह उपासना ही हमें वासनाओं के आक्रमण से बचाकर सोमरक्षण के योग्य बनायेगी, [२] उस प्रभु का हम उपासन करें जो प्(रियम्) = हमारी प्रीति का कारण बनते हैं, प्रभु के प्रकाश को हृदय में देखते हुए एक अद्भुत ही आनन्द का हम अनुभव करते हैं । (पनिप्नतम्) = [पन स्तुतौ] वे प्रभु खूब ही स्तुति के योग्य हैं। शब्द प्रभु की स्तुति को सीमित नहीं कर पाते, प्रभु की महिमा वर्णनातीत है, (वाचाम्) = अगोचर है । (युवानम्) = वे प्रभु हमारी सब बुराइयों को हमारे से दूर करके सब अच्छाइयों को हमारे से मिलानेवाले हैं [यु मिश्रणामिश्रणयोः] । (आहुतीवृधम्) = वे प्रभु हमारे जीवनों में आहुति-त्यागवृत्ति को बढ़ानेवाले हैं। स्वयं हविरूप होते हुए वे हमें भी हविर्मय बनने की प्रेरणा देते हैं।
Connotation: - भावार्थ- हम प्रभु का उपासन करें। प्रभु हमें प्रीति को प्राप्त करायेंगे, हमारी बुराइयों को दूर करेंगे, हमारे जीवनों में त्यागभावनाओं को बढ़ायेंगे ।
Reads 351 times

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (प्रियम्) सर्वानन्ददायकं (पनिप्नतम्) वेदादिशब्द- राश्याविर्भावकं (युवानम्) सदैकरसं (आहुतीवृधम्) प्रकृत्या महान्तं परमात्मानं (नमः) नम्रतादिभावान् (बिभ्रतः) धारयन्तो वयं (उपागन्म) प्राप्नुम ॥२९॥
Reads 351 times

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - May we, bearing yajnic homage, reach Soma, dear, admirably vocal and expressive, youthful creator and promoter of nature’s and humanity’s yajnic offerings into the divine yajnic evolution of the cosmos.