Go To Mantra

ते नो॑ वृ॒ष्टिं दि॒वस्परि॒ पव॑न्ता॒मा सु॒वीर्य॑म् । सु॒वा॒ना दे॒वास॒ इन्द॑वः ॥

English Transliteration

te no vṛṣṭiṁ divas pari pavantām ā suvīryam | suvānā devāsa indavaḥ ||

Mantra Audio
Pad Path

ते । नः॒ । वृ॒ष्टिम् । दि॒वः । परि॑ । पव॑न्ताम् । आ । सु॒ऽवीर्य॑म् । सु॒वा॒नाः । दे॒वासः॑ । इन्द॑वः ॥ ९.६५.२४

Rigveda » Mandal:9» Sukta:65» Mantra:24 | Ashtak:7» Adhyay:2» Varga:5» Mantra:4 | Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:24


Reads 351 times

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (ते) वे विद्वान् (नः) हमारे लिये (वृष्टिं) वृष्टि को (दिवस्परि) द्युलोक से बरसायें। ऐश्वर्यवाले (इन्दवः) दिव्यगुणसम्पन्न विद्वान् (सुवीर्यम्) पराक्रम को (सुवानाः) पैदा करते हुए (आ पवन्तां) हमको सब प्रकार से पवित्र करें ॥२४॥
Connotation: - द्युलोक से वृष्टि करने का तात्पर्य यहाँ हिमालय आदि दिव्य स्थानों से जल की धाराओं से सींच देने का है। जो विद्वान् व्यवहारविषय के सब विद्याओं के वेत्ता होते हैं, वे अपने विद्याबल से प्रजा में सुवृष्टि करके अद्भुत पराक्रम को उत्पन्न कर देते हैं। उक्त विद्वानों से शिक्षा लेकर सुरक्षित होने का उपदेश यहाँ परमात्मा ने किया है ॥२४॥
Reads 351 times

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

देवासः-इन्दवः

Word-Meaning: - [१] (ते) = वे गत मन्त्रों में वर्णित सोमकण (नः) = हमारे लिये (दिवः परि) = द्युलोक से मस्तिष्क में स्थित सहस्रारचक्र से (वृष्टिम्) = धर्ममेघ समाधि में होनेवाली आनन्द की वर्षा को (पवन्ताम्) = प्राप्त करायें। सोमकणों का रक्षण समाधि सिद्धि में भी बड़ा सहायक होता है। [२] ये सोमकण (सुवीर्यम्) = उत्पन्न किये जाते हुए ये सोमकण (देवासः) = दिव्य गुणों को जन्म देनेवाले होते हैं, और (इन्दवः) = हमें शक्तिशाली बनानेवाले हैं।
Connotation: - भावार्थ- सोमकणों का रक्षण हमें समाधि के सर्वोच्च आनन्द को प्राप्त करने के योग्य बनाता है। ये हमारे में दिव्यगुणों को पैदा करते हैं और हमें शक्ति सम्पन्न बनाते हैं ।
Reads 351 times

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (ते) ते विद्वांसः (नः) अस्मभ्यं (वृष्टिं) वृष्टिं (दिवस्परि) द्युलोकतो वर्षयन्तु। (इन्दवः) ऐश्वर्यसम्पन्नाः (देवासः) दिव्यगुणाः पण्डिताः (सुवीर्यम्) पराक्रमम् (सुवानाः) उत्पादयन्तः (आ पवन्तां) सर्वथास्मान् पवित्रयन्तु ॥२४॥
Reads 351 times

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - May the divinities of nature and humanity, pure, vibrant and blissful, activated, seasoned and cultured anywhere, bring us showers of power, virility and creativity from the lights of heaven and energise and sanctify us.