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परि॑ णो याह्यस्म॒युर्विश्वा॒ वसू॒न्योज॑सा । पा॒हि न॒: शर्म॑ वी॒रव॑त् ॥

English Transliteration

pari ṇo yāhy asmayur viśvā vasūny ojasā | pāhi naḥ śarma vīravat ||

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Pad Path

परि॑ । नः॒ । या॒हि॒ । अ॒स्म॒ऽयुः । विश्वा॑ । वसू॑नि । ओज॑सा । पा॒हि । नः॒ । शर्म॑ । वी॒रऽव॑त् ॥ ९.६४.१८

Rigveda » Mandal:9» Sukta:64» Mantra:18 | Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:39» Mantra:3 | Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:18


ARYAMUNI

Word-Meaning: - हे परमात्मन् ! (अस्मयुः) भक्तों को प्राप्त होनेवाले आप (नः) हम लोगों के (विश्वा) सम्पूर्ण (वसूनि) धनों को (ओजसा) बल के सहित (परियाहि) सब ओर से प्राप्त कराइये और (नः) हम लोगों के (वीरवत्) वीर पुत्रों की और (शर्म) शील की (पाहि) रक्षा कीजिये ॥१८॥
Connotation: - जो लोग सदाचारी हैं और सदाचारी से अपने शील को बनाते हैं, परमात्मा उनकी सदैव रक्षा करता है ॥१८॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

वीरवत शर्म

Word-Meaning: - [१] हे सोम ! तू (अस्मयुः) = हमारे हित की कामना करता हुआ (ओजसा) = ओजस्विता के साथ (न:) = हमारे (विश्वा वसूनि) = सब वसुओं के (परियाहि) = चारों ओर गतिवाला हो। अर्थात् हमारे वसुओं का रक्षण कर। [२] निवास के लिये आवश्यक सब तत्त्वों को हमारे में सुरक्षित करके (नः) = हमारे लिये (वीरवत्) = वीरता से पूर्ण (शर्म) = सुख को (पाहि) = रक्षित कर । हम तेरे द्वारा वीर बनें और सुखी हों।
Connotation: - भावार्थ - शरीर में सुरक्षित सोम सब वसुओं का रक्षण करता है। हमें वीर बनाता है, सुख प्राप्त कराता है।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - हे परमात्मन् ! (अस्मयुः) भक्तैः प्राप्तव्यो भवान् (नः) अस्माकं (विश्वा) सम्पूर्णानि (वसूनि) धनानि (ओजसा) सबलानि (परियाहि) सर्वतः प्रापयतु। अथ च (नः) अस्माकं (वीरवत्) वीरान् पुत्रान् (शर्म) शीलं च (पाहि) रक्षयतु ॥१८॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O lord of peace, light and beauty divine, lover of us all, bring us all wealths of the world with the light and lustre of glory. Protect our peace and home blest with brave progeny.