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असृ॑ग्रन्दे॒ववी॑त॒येऽत्या॑स॒: कृत्व्या॑ इव । क्षर॑न्तः पर्वता॒वृध॑: ॥

English Transliteration

asṛgran devavītaye tyāsaḥ kṛtvyā iva | kṣarantaḥ parvatāvṛdhaḥ ||

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Pad Path

असृ॑ग्रन् । दे॒वऽवी॑तये । अत्या॑सः । कृत्व्याः॑ऽइव । क्षर॑न्तः । प॒र्व॒त॒ऽवृधः॑ ॥ ९.४६.१

Rigveda » Mandal:9» Sukta:46» Mantra:1 | Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:3» Mantra:1 | Mandal:9» Anuvak:2» Mantra:1


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ARYAMUNI

अब पदार्थविद्या के जाननेवाले विद्वानों के गुणों का उपदेश करते हैं।

Word-Meaning: - उस परमात्मा द्वारा (पर्वतावृधः) ज्ञान और कर्म से बढ़े हुए (क्षरन्तः) उपदेश को देनेवाले (कृत्व्याः इव) कर्मयोगियों के समान (अत्यासः) सर्वकर्मों में व्यापक विद्वान् (देववीतये) देवों के तृप्तिकारक यज्ञ के लिये (असृग्रन्) पैदा किये जाते हैं ॥१॥
Connotation: - परमात्मा ज्ञानरूप यज्ञ के लिये ज्ञानी-विज्ञानी पुरुषों को उत्पन्न करता है, इसलिये सब मनुष्यों को चाहिये कि वे कर्म्मयोगी तथा ज्ञानयोगी विद्वानों को बुलाकर अपने यज्ञादि कर्म्मों का आरम्भ किया करें ॥१॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'पर्वतावृधः' सोमासः

Word-Meaning: - [१] ये सोम (देववीतये) = दिव्य गुणों की तथा दिव्य गुणों के द्वारा उस देव की प्राप्ति के लिये (असृग्रन्) = उत्पन्न किये जाते हैं। ये सोम (इव) = उस प्रकार के हैं जैसे कि (कृत्व्याः) = कर्म में कुशल (अत्यासः) = निरन्तर गतिशील घोड़े हों। जैसे ये घोड़े हमें लक्ष्य स्थान पर पहुँचाते हैं, इसी प्रकार ये सोमकण भी हमारी लक्ष्य प्राप्ति का कारण बनते हैं। [२] ये (पर्वतावृधः) = [पर्वतेन =] ज्ञान व ब्रह्मचर्य आदि से वृद्धि को प्राप्त होनेवाले सोम (क्षरन्तः) = शरीर में व्याप्त होनेवाले होते हैं । [ य० ३५।१५] आचार्य पर्वत का अर्थ 'ज्ञान व ब्रह्मचर्य' करते हैं। सोमरक्षण के ये ही साधन हैं। इनके द्वारा सोमकण शरीर में ही क्षरित होते हैं ।
Connotation: - भावार्थ - ज्ञान व ब्रह्मचर्य से शरीर में ही गतिवाले ये सोमकण दिव्य गुणों के वर्धन व प्रभु की प्राप्ति के लिये होते हैं।
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ARYAMUNI

अथ पदार्थविद्याविदां विदुषां गुणा उपदिश्यन्ते।

Word-Meaning: - तेन परमात्मना (पर्वतावृधः) ज्ञानेन कर्मणा च वृद्धाः (क्षरन्तः) उपदेशं ददानाः (कृत्व्याः इव) कर्मयोगिनु इव (अत्यासः) सर्वस्मिन् कर्मणि व्यापका विद्वांसः (देववीतये) देवानां तर्पकाय यज्ञाय (असृग्रन्) सृज्यन्ते ॥१॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Performers of heroic action, like universal presences grown to veteran heights by knowledge and action, are born and created for divine service of the world and they let flow streams of soma joy for general humanity.