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सु॒वि॒तस्य॑ मनाम॒हेऽति॒ सेतुं॑ दुरा॒व्य॑म् । सा॒ह्वांसो॒ दस्यु॑मव्र॒तम् ॥

English Transliteration

suvitasya manāmahe ti setuṁ durāvyam | sāhvāṁso dasyum avratam ||

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Pad Path

सु॒वि॒तस्य॑ । म॒ना॒म॒हे॒ । अति॑ । सेतु॑म् । दुः॒ऽआ॒व्य॑म् । सा॒ह्वांसः॑ । दस्यु॑म् । अ॒व्र॒तम् ॥ ९.४१.२

Rigveda » Mandal:9» Sukta:41» Mantra:2 | Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:31» Mantra:2 | Mandal:9» Anuvak:2» Mantra:2


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सुवितस्य दुराव्यम् सेतुम्) ऐसे पूर्वोक्त लोकों को उत्पन्न करनेवाले दुःख में प्राप्त करने योग्य संसार के सेतुरूप ईश्वर की (मनामहे) स्तुति करते हैं, जो परमात्मा (अव्रतम् दस्युम् साह्वांसः) वेदधर्म को नहीं पालन करनेवाले दुराचारियों का शमन करनेवाला है ॥२॥
Connotation: - परमात्मा इस चराचर जगत् का सेतु है अर्थात् मर्य्यादा है, उसी की मर्य्यादा में सूर्य्य-चन्द्रादि सब लोक परिभ्रमण करते हैं। मनुष्यों को चाहिये कि उस मर्य्यादा पुरुषोत्तम को सदैव अपना लक्ष्य बनावें ॥२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'सुवित' सोम का सेतु

Word-Meaning: - [१] (सुवितस्य) = सब सुन्दर गतियों के कारणभूत सोम के [शोभनं इतं यस्मात्] (दुराव्यम्) = सब बुराइयों से बचाने में उत्तम सेतुम् शरीर में बंधन को [ षिञ् बन्धने] (अतिमनामहे) = अतिशयेन आदृत करते हैं। शरीर में सोमरक्षण के महत्त्व को समझते हुए हम सदा शुभ मार्ग पर चलते हैं और अशुभ से अपना रक्षण कर पाते हैं । [२] सोमरक्षण का ही यह परिणाम है कि हम (अव्रतम्) = सब नियमों का भंग करनेवाले (दस्युम्) = नाशक आसुरी भाव को (साह्वांसः) = कुचलनेवाले बनते हैं ।
Connotation: - भावार्थ - शरीर में सोमरक्षण से हम आसुरी भावों का विनष्ट करते हैं और शुभ मार्ग पर चलनेवाले बनते हैं । I

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सुवितस्य दुराव्यम् सेतुम्) एवंविधपूर्वोक्तलोकानां जनयितारं दुःसहसंसारस्य सेतुरूपं परमात्मानं (मनामहे) स्तुमः यः परमात्मा (अव्रतम् दस्युम् साह्वांसः) वेदधर्मविमुखान् दुराचारान् शमयितास्ति ॥२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - We honour and adore that divine bridge to peace and prosperity, otherwise difficult to cross, which faces and overcomes selfish, uncreative and destructive elements of life addicted to lawlessness.