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वृषा॑णं॒ वृष॑भिर्य॒तं सु॒न्वन्ति॒ सोम॒मद्रि॑भिः । दु॒हन्ति॒ शक्म॑ना॒ पय॑: ॥

English Transliteration

vṛṣāṇaṁ vṛṣabhir yataṁ sunvanti somam adribhiḥ | duhanti śakmanā payaḥ ||

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Pad Path

वृषा॑णम् । वृष॑ऽभिः । य॒तम् । सु॒न्वन्ति॑ । सोम॑म् । अद्रि॑ऽभिः । दु॒हन्ति॑ । शक्म॑ना । पयः॑ ॥ ९.३४.३

Rigveda » Mandal:9» Sukta:34» Mantra:3 | Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:24» Mantra:3 | Mandal:9» Anuvak:2» Mantra:3


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - विद्वान् लोग (वृषाणम्) सब कामनाओं के देनेवाले (सोमम्) परमात्मा को (यतम्) ज्ञान का विषय बनाकर (वृषभिः अद्रिभिः) अखिल कामनाओं की साधक इन्द्रियवृत्तियों द्वारा (शक्मना) ज्ञानयोग और कर्म योगद्वारा (सुन्वन्ति) प्रेरणा करते हुए (पयः) ब्रह्मानन्द को (दुहन्ति) दुहते हैं ॥३॥
Connotation: - जो लोग कर्मयोगी तथा ज्ञानयोगी बनकर अभ्यास करते हैं, वे ही लोग ब्रह्मामृतरूप दुग्ध को परमात्मरूप कामधेनु से दोहन करते हैं, अन्य नहीं ॥३॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

आप्यायन

Word-Meaning: - [१] (वृषाणम्) = शक्ति को देनेवाले, (वृषभिः यतम्) = शक्तिशाली पुरुषों से शरीर में ही संयत किये गये (सोमम्) = सोम को [वीर्यशक्ति को] (अद्रिभिः) = उपासनाओं के द्वारा (सुन्वन्ति) = अपने में उत्पन्न करते हैं। प्रभु की उपासना से सोम शरीर में ही सुरक्षित रहता है । [२] (शक्मना) = शक्ति की प्राप्ति के हेतु से ये उपासक इस सोम से (पयः दुहन्ति) = शरीर में आप्यायन-वर्धन का दोहन करते हैं, प्रपूरण करते हैं। सोम के रक्षण से सब अंगों की शक्ति का वर्धन व आप्यायन होता है ।
Connotation: - भावार्थ- सोमरक्षण से सब अंगों की शक्ति का वर्धन करते हैं ।
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - विद्वांसः (वृषाणम्) सर्वकामदं (सोमम्) परमात्मानं (यतम्) बुद्धिविषयं विधाय (वृषभिः अद्रिभिः) अखिलकामसाधिकाभिः इन्द्रियवृत्तिभिः (शक्मना) ज्ञानयोगेन कर्मयोगेन च (सुन्वन्ति) प्रेरयन्तः (पयः) ब्रह्मानन्दं (दुहन्ति) अनुभवन्ति ॥३॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Effusive and abundant generative energy of soma, divine creativity, collected and controlled by virile and visionary sages with adamantine discipline of body, sense and mind, later scholarly yogis distil and advance further with their spiritual power and thus create still higher food for the soul.