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तं त्वा॒ मदा॑य॒ घृष्व॑य उ लोककृ॒त्नुमी॑महे । तव॒ प्रश॑स्तयो म॒हीः ॥
English Transliteration
Mantra Audio
taṁ tvā madāya ghṛṣvaya u lokakṛtnum īmahe | tava praśastayo mahīḥ ||
Pad Path
तम् । त्वा॒ । मदा॑य । घृष्व॑ये । ऊँ॒ इति॑ । लो॒क॒ऽकृ॒त्नुम् । ई॒म॒हे॒ । तव॑ । प्रऽश॑स्तयः । म॒हीः ॥ ९.२.८
Rigveda » Mandal:9» Sukta:2» Mantra:8
| Ashtak:6» Adhyay:7» Varga:19» Mantra:3
| Mandal:9» Anuvak:1» Mantra:8
ARYAMUNI
Word-Meaning: - हे परमेश्वर ! (तम्) उस (त्वा) तुझको (ईमहे) हम प्राप्त हों, जो तू (लोककृत्नुम्) सम्पूर्ण संसार का रचनेवाला है। (मदाय) आनन्द की प्राप्ति (उ) और (घृष्वये) दुःखों की निवृत्ति के लिये प्राप्त हो, (तव) तुम्हारी (प्रशस्तयः) स्तुतियें (महीः) पृथिवी भर में पाई जाती हैं ॥८॥
Connotation: - हे परमात्मन् ! आपका स्तवन प्रत्येक वस्तु कर रही है और आप सम्पूर्ण संसार के उत्पति-स्थिति-संहार करनेवाले हैं। आपकी प्राप्ति से सम्पूर्ण अज्ञानों की निवृत्ति होती है, इसलिये हम आपको प्राप्त होते हैं ॥८॥
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
उल्लास - रोग विनाश- -प्रकाश
Word-Meaning: - [१] हे सोम ! (तं त्वा) = उस तुझ को हम (ईमहे) = याचना करते हैं, तेरी प्राप्ति के व रक्षण के लिये हम यत्नशील होते हैं। जो तू (लोककृत्नुम्) = प्रकाश [आलोक] को करनेवाला है । सोमरक्षण से ज्ञानाग्नि का दीपन होकर हमारा जीवन प्रकाशमय बनता है। [२] हे सोम ! हम इसलिए तेरी प्राप्ति के लिये यत्नशील होते हैं कि (मदाय) = तू हमारे जीवनों में उल्लास का कारण बनता है, उल्लास के लिये होता है । (उ) = और घृष्वये सब शत्रुओं को घर्षण के लिये होता है । सोमरक्षण से सब रोगकृमिरूप शत्रुओं का संहार हो जाता है। इस प्रकार हे सोम ! (तव) = तेरी (प्रशस्तयः) = प्रशस्तियाँ [प्रशंसायें] (मही:) = महान् हैं। मानव जीवन के उत्कर्ष में सर्वप्रमुख स्थान इस 'सोम' का ही है। इसी में जीवन है 'मरणं बिन्दुपातेन, जीवनं बिन्दुधारणात्' ।
Connotation: - भावार्थ- सुरक्षित सोम [क] उल्लास का कारण होता है, [ख] रोगकृमिरूप शत्रुओं का विनाश करता है, [ग] ज्ञानाग्नि को दीप्त करके जीवन को प्रकाशमय बनाता है ।
ARYAMUNI
Word-Meaning: - हे परमेश्वर ! (तम्) प्रसिद्धम् (त्वा) भवन्तम् (ईमहे) वयं प्राप्नुयाम यो भवान् (लोककृत्नुम्) सम्पूर्णसंसारस्य रचयितास्ति स त्वम् (मदाय) आनन्दाय (उ) किञ्च (घृष्वये) दुःखनिवृत्त्यै प्राप्तो भव (तव) भवतः (प्रशस्तयः) स्तुतयः (महीः) पृथिवीमात्रे लभ्यन्ते ॥८॥
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - For the sake of joy and elimination of the suffering of life, we adore you, creator of the worlds of nature and humanity. O lord, great are your glories sung all round.
