अवा॑वशन्त धी॒तयो॑ वृष॒भस्याधि॒ रेत॑सि । सू॒नोर्व॒त्सस्य॑ मा॒तर॑: ॥
English Transliteration
Mantra Audio
avāvaśanta dhītayo vṛṣabhasyādhi retasi | sūnor vatsasya mātaraḥ ||
Pad Path
अवा॑वशन्त । धी॒तयः॑ । वृ॒ष॒भस्य॑ । अधि॑ । रेत॑सि । सू॒नोः । व॒त्सस्य॑ । मा॒तरः॑ ॥ ९.१९.४
Rigveda » Mandal:9» Sukta:19» Mantra:4
| Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:9» Mantra:4
| Mandal:9» Anuvak:1» Mantra:4
Reads 368 times
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (धीतयः) सात प्रकृतियें (वृषभस्य) सब कामप्रद परमात्मा के (अधिरेतसि) कार्य में (अवावशन्त) संगत होती हैं (सूनोः वत्सस्य) जैसे वत्स के लिये (मातरः) गायें संगत होती हैं ॥४॥
Connotation: - गऊ अपने बच्चे को दुग्ध पिलाकर जिस प्रकार परिपुष्ट करती है, इसी प्रकार प्रकृति अपने इस कार्यरूप ब्रह्माण्ड को अपने परमाण्वादि दुग्धों द्वारा परिपुष्ट करती है। तात्पर्य यह है कि प्रकृति इस जगत् का उपादान कारण है, परमात्मा निमित्त कारण है और यह संसार वत्ससमान प्रकृति और वृषभरूपी पुरुष का कार्य है ॥४॥
Reads 368 times
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
सूनोः वत्सस्य मातरः
Word-Meaning: - [१] (धीतयः) = सोम का पान करनेवाले लोग [ धेट् पाने] (वृषभस्य) = उस शक्तिशाली सुखों का वर्षण करनेवाले प्रभु के (अधिरेतसि) = इस रेतस् के विषय में (अवावशन्त) = कामना करते हैं। प्रभु से उत्पन्न किये गये इस सोम को अपने अन्दर ही पीने की इच्छा करती हैं, इसे अपने अन्दर सुरक्षित रखते हैं। [२] ये व्यक्ति (सूनोः) = हृदयस्थरूपेण प्रेरणा देनेवाले [षू प्रेरणे] (वत्सस्य) = वेद-वाणियों का उच्चारण करनेवाले उस प्रभु के (मातरः) = ज्ञान प्राप्त करनेवाले होते हैं [प्र०मा = to know] | हृदयस्थ प्रभु की प्रेरणा को ये सुनते हैं और उससे उच्चरित ज्ञान-वाणियों के द्वारा प्रभु को जाननेवाले होते हैं।
Connotation: - भावार्थ - प्रभु से उत्पन्न किये गये सोम को अपने अन्दर पीनेवाले व्यक्ति प्रभु प्रेरणा को सुन पाते हैं, उससे उच्चारित ज्ञान वाणियों को सुनते हुए प्रभु का ज्ञान प्राप्त करनेवाले होते हैं |
Reads 368 times
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (धीतयः) सप्त प्रकृतयः (वृषभस्य) सर्वकामप्रदस्य परमात्मनः (अधिरेतसि) कार्येषु (अवावशन्त) सङ्गता भवति (सूनोः वत्सस्य) यथा वत्सार्थं (मातरः) मातरो गावः सङ्गच्छन्ते तद्वत् ॥४॥
Reads 368 times
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - Just as females in season yearn for a darling off spring, so do the evolving forms of Prakrti, Mother Nature, inspired by desire, long for the life seed of the omnipotent father of universal life.
