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ती॒व्राः सोमा॑स॒ आ ग॑हि सु॒तासो॑ मादयि॒ष्णव॑: । पिबा॑ द॒धृग्यथो॑चि॒षे ॥

English Transliteration

tīvrāḥ somāsa ā gahi sutāso mādayiṣṇavaḥ | pibā dadhṛg yathociṣe ||

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Pad Path

ती॒व्राः । सोमा॑सः । आ । ग॒हि॒ । सु॒तासः॑ । मा॒द॒यि॒ष्णवः॑ । पिब॑ । द॒धृक् । यथा॑ । ओ॒चि॒षे ॥ ८.८२.२

Rigveda » Mandal:8» Sukta:82» Mantra:2 | Ashtak:6» Adhyay:6» Varga:1» Mantra:2 | Mandal:8» Anuvak:9» Mantra:2


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे इन्द्र ! (यः+उ) जो (वाजः) विज्ञान और धन (विप्रेभिः) बुद्धिमान् जनों से (सनित्वः) अभिलषित (ते+नु+अस्ति) तेरे निकट है, (तं) उस धन को (अस्माभिः) हम लोगों के मध्य (सु+सनुहि) वितीर्ण कर ॥८॥
Connotation: - सब कोई भगवान् से यह प्रार्थना करें कि प्रत्येक मनुष्य को तुल्य अधिकार मिले ॥८॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'तीव्राः मादयिष्णवः' सोमासः

Word-Meaning: - [१] ये (सोमासः) = सोमकण (तीव्रा:) = [तीव्= To be strong ] बड़ी शक्ति को देनेवाले हैं। सो हे जीव ! तू (आगहि) = इनका सब प्रकार से ग्रहण कर इनके प्रति आनेवाला हो । (सुतासः) = उत्पन्न हुए ये सोमकण (मादयिष्णवः) = आनन्द व मस्ती को देनेवाले हैं। [२] (दधृक्) = काम-क्रोध आदि शत्रुओं का धर्षण करनेवाला होता हुआ तू (पिबा) = इनका पान कर इन्हें शरीर में ही सुरक्षित कर । (यथा) = जिससे (ओचिषे) = तू इनका अपने में समवाय करनेवाला हो। तेरे रुधिर के साथ ये समवेत होकर सर्वत्र शरीर में व्याप्त रहें।
Connotation: - भावार्थ- शरीर में उत्पन्न हुए तथा शरीर में ही व्याप्त किये गये सोमकण हमें शक्तिशाली बनाते हैं और हमें आनन्दित करते हैं।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे इन्द्र ! यः+उ=य एव। वाजः=विज्ञानम्। विप्रेभिः=मेधाविभिः। सनित्वः=संभजनीयः कमनीयः। ते=तव। नु=निश्चयेन अस्ति। तं+अस्माभिः=अस्मभ्यम्। सु=सनुहि=सुष्ठु देहि ॥८॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Come, grab at the sharp and strong soma draughts of elixir, distilled, energised and most exhilara ting, and drink without inhibition to your heart’s desire.