आशवः, द्रवित्नवः, सुरथासः
Word-Meaning: - [१] (मां) = मुझे (शविष्ठस्य) = उस सर्वाधिक शक्तिसम्पन्न प्रभु के प्रभु से दिये गये (चत्वारः) = 'इन्द्रियाँ, मन, बुद्धि और हृदय रूप चार प्रमुख साधन (तुग्र्य वयः न) = शत्रुसंहारक आयुष्य के समान (प्रयः) = [प्रयस्] उद्योग की (अभि) = ओर वक्षन् प्राप्त कराएँ। इन इन्द्रियों आदि के द्वारा हमारा जीवन काम, क्रोध आदि शत्रुओं का संहार करनेवाला हो तथा हम सतत यत्नशील हों- आलस्य से सदा दूर रहें। [२] ये चारों (आशवः) = शीघ्रता से कार्यों में व्याप्त होनेवाले हों। (द्रवित्नवः) = [द्रु अभिगतौ] शत्रुओं पर आक्रमण करनेवाले हों और इस प्रकार हमें प्रभु की ओर ले चलनेवाले हों और (सुरथासः) = शरीररूप रथ को सदा उत्तम रखें।
Connotation: - भावार्थ- हमारी 'इन्द्रियाँ, मन, बुद्धि और हृदय' हमारे जीवन को शत्रुसंहारक तथा यत्नशील बनाएँ। इनके द्वारा हमारा यह शरीररथ शीघ्रता से कार्यों में व्याप्त होनेवाला व प्रभु की ओर हमें ले चलनेवाला हो।