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मां च॒त्वार॑ आ॒शव॒: शवि॑ष्ठस्य द्रवि॒त्नव॑: । सु॒रथा॑सो अ॒भि प्रयो॒ वक्ष॒न्वयो॒ न तुग्र्य॑म् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

māṁ catvāra āśavaḥ śaviṣṭhasya dravitnavaḥ | surathāso abhi prayo vakṣan vayo na tugryam ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

माम् । च॒त्वारः॑ । आ॒शवः॑ । शवि॑ष्ठस्य । द्र॒वि॒त्नवः॑ । सु॒ऽरथा॑सः । अ॒भि । प्रयः॑ । वक्ष॑न् । वयः॑ । न । तुग्र्य॑म् ॥ ८.७४.१४

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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:74» मन्त्र:14 | अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:23» मन्त्र:4 | मण्डल:8» अनुवाक:8» मन्त्र:14


शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - (अङ्गिरः) हे सम्पूर्ण जगत् में अङ्गों को रस पहुँचानेवाले (पावक) हे शुद्धिकारक (अग्ने) सर्वाधार जगदीश ! (यं+त्वा) जिस तुझको (गोपवनः) रक्षक श्रेष्ठ तत्ववेत्ता ऋषिगण (गिरा) निज-निज स्तुति द्वारा (चनिष्ठत्) स्तुति करते हैं, (सः) वह तू (हवम्) हम लोगों की प्रार्थना (श्रुधि) सुन ॥११॥
भावार्थभाषाः - जो इस संसार का रसस्वरूप और संशोधक है, उसी की स्तुति प्रार्थना ऋषिगण करते आए हैं। हम लोग भी उनका अनुकरण करें ॥११॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

आशवः, द्रवित्नवः, सुरथासः

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (मां) = मुझे (शविष्ठस्य) = उस सर्वाधिक शक्तिसम्पन्न प्रभु के प्रभु से दिये गये (चत्वारः) = 'इन्द्रियाँ, मन, बुद्धि और हृदय रूप चार प्रमुख साधन (तुग्र्य वयः न) = शत्रुसंहारक आयुष्य के समान (प्रयः) = [प्रयस्] उद्योग की (अभि) = ओर वक्षन् प्राप्त कराएँ। इन इन्द्रियों आदि के द्वारा हमारा जीवन काम, क्रोध आदि शत्रुओं का संहार करनेवाला हो तथा हम सतत यत्नशील हों- आलस्य से सदा दूर रहें। [२] ये चारों (आशवः) = शीघ्रता से कार्यों में व्याप्त होनेवाले हों। (द्रवित्नवः) = [द्रु अभिगतौ] शत्रुओं पर आक्रमण करनेवाले हों और इस प्रकार हमें प्रभु की ओर ले चलनेवाले हों और (सुरथासः) = शरीररूप रथ को सदा उत्तम रखें।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हमारी 'इन्द्रियाँ, मन, बुद्धि और हृदय' हमारे जीवन को शत्रुसंहारक तथा यत्नशील बनाएँ। इनके द्वारा हमारा यह शरीररथ शीघ्रता से कार्यों में व्याप्त होनेवाला व प्रभु की ओर हमें ले चलनेवाला हो।

शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - हे अङ्गिरः=सर्वाङ्गानां रसस्वरूप ! हे पावक=शुद्धिकारक ! हे अग्ने=सर्वाधार जगदीश ! यं+त्वा=यं त्वाम्। गोपवनः=रक्षकश्रेष्ठ ऋषिः। गिरा=स्तुत्या। चनिष्ठत्=स्तौति। स त्वम्। हवम्=अस्माकं स्तोत्रम्। श्रुधि=शृणु ॥११॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - The four fast and smart celebrants of the most potent Agni riding the holy chariot of life may, I pray, bring me food and energy as well as the light and vitality of divine inspiration.