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यं त्वा॑ गो॒पव॑नो गि॒रा चनि॑ष्ठदग्ने अङ्गिरः । स पा॑वक श्रुधी॒ हव॑म् ॥

English Transliteration

yaṁ tvā gopavano girā caniṣṭhad agne aṅgiraḥ | sa pāvaka śrudhī havam ||

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Pad Path

यम् । त्वा॒ । गो॒पव॑नः । गि॒रा । चनि॑ष्ठत् । अ॒ग्ने॒ । अ॒ङ्गि॒रः॒ । सः । पा॒व॒क॒ । श्रु॒धि॒ । हव॑म् ॥ ८.७४.११

Rigveda » Mandal:8» Sukta:74» Mantra:11 | Ashtak:6» Adhyay:5» Varga:23» Mantra:1 | Mandal:8» Anuvak:8» Mantra:11


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - (अग्ने) हे सर्वाधार जगदीश ! (ते) आपकी कृपा से प्राप्त (सा) वह सुमति (शन्तमा) जगत् में कल्याणकारिणी (चनिष्ठा) बहु अन्नवती (प्रिया) और लोकप्रिया (भवतु) होवे, (तया) उस कल्याणी बुद्धि से (सुष्टुतः) अच्छे प्रकार प्रार्थित होकर तू (वर्धस्व) हम लोगों को बढ़ा ॥८॥
Connotation: - हे मनुष्यों ! यदि उसकी कृपा से तुममें नवीन और तीव्र बुद्धि उत्पन्न हो, तो उससे जगत् का कल्याण और ईश्वर की स्तुति करो ॥८॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

गोपवनः गिरा चनिष्ठत्

Word-Meaning: - [१] हे (अग्ने) = अग्रणी (अंगिरः) = अंग-प्रत्यंगों में रस का संचार करनेवाले प्रभो ! (यं त्वा) = जिन आपको (गोपवन:) = ज्ञान की वाणियों को पवित्र करनेवाला उपासक (गिरा) = स्तुतिवाणियों के द्वारा (चनिष्ठत्) = प्राप्त करने की कामना करता है। [२] (सः) = वे आप, हे (पावक) = पवित्र करनेवाले प्रभो ! (हवम्) = पुकार को (श्रुधि) = सुनिये।
Connotation: - भावार्थ-स्तुतिवाणियों के द्वारा हम प्रभु को प्राप्त करने की कामना करें। प्रभु हमारे जीवन को पवित्र करते हैं।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे अग्ने=सर्वाधार ईश ! ते=तव कृपया। सा=मतिः। शन्तमा=कल्याणकारिणी। चनिष्ठा=बहुधनवती। प्रिया च भवतु। तया+सुष्टुतः=प्रार्थितः। वर्धस्व=अस्मान् वर्धय ॥८॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Agni, light of the world, dear as breath of life, all purifier, whom the poet visionary of light and the Word celebrates, pray listen to our invocation and song of adoration.