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प्र स॒प्तव॑ध्रिरा॒शसा॒ धारा॑म॒ग्नेर॑शायत । अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑: ॥

English Transliteration

pra saptavadhrir āśasā dhārām agner aśāyata | anti ṣad bhūtu vām avaḥ ||

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Pad Path

प्र । स॒प्तऽव॑ध्रिः । आ॒ऽशसा॑ । धारा॑म् । अ॒ग्नेः । अ॒शा॒य॒त॒ । अन्ति॑ । सत् । भू॒तु॒ । वा॒म् । अवः॑ ॥ ८.७३.९

Rigveda » Mandal:8» Sukta:73» Mantra:9 | Ashtak:6» Adhyay:5» Varga:19» Mantra:4 | Mandal:8» Anuvak:8» Mantra:9


SHIV SHANKAR SHARMA

फिर उसी अर्थ को कहते हैं।

Word-Meaning: - मैं एक जन प्रार्थी (यामहूतमा) समय-समय पर अतिशय पुकारने योग्य (अश्विना) महाराज और अमात्य के निकट (यामि) जाता हूँ तथा उनके (आप्यम्) बन्धुत्व को मैं प्राप्त होता हूँ। हे मनुष्यों ! आप भी उनके निकट जाकर निज क्लेश का वृत्त सुनावें और शुभाचरण से उनके बन्धु बनें ॥६॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

अग्नि का धारा का हृदय में शयन

Word-Meaning: - [१] (सप्तवधिः) = 'कर्णाविमौ नासिके अक्षणी मुखम्' दो कान, दो नासिकाछिद्र, दो आँखें व मुख रूप सातों इन्द्रियों को संयम रूप से बांधनेवाला यह उपासक आशसा उत्तम आशंसन व स्तवन के द्वारा (अग्नेः धाराम्) = [धारा - वाग् नि० १.११] उस अग्रेणी प्रभु की वाणी को (प्र आशायत) = अपने में निवास करता है। [२] हे प्राणापानो! (वां) = आप का (अवः) = रक्षण (सत्) = उत्तम है। उससे हम प्रभु की वाणी को सुन पाते हैं। वह रक्षण (अन्तिभूतु) = हमारे समीप हो। आपसे रक्षित हुए हुए हम पवित्र हृदय में प्रभु की वाणी को सुनें।
Connotation: - भावार्थ- प्राणसाधना मनुष्य को कान आदि सातों इन्द्रियों का संयम करने में समर्थ करती है। सो हमें प्राणापान का रक्षण प्राप्त हो।

SHIV SHANKAR SHARMA

पुनस्तमर्थमाह।

Word-Meaning: - अहं प्रार्थी यामहूतमा=यामहूतमौ=यामे काले काले अतिशयेन ह्वातव्यौ=प्रार्थयितव्यौ अश्विनौ। यामि=गच्छामि। तथा तयोरेव। नेदिष्ठं=अन्तिकतमम्। आप्यं=बन्धुत्वञ्च। यामि=व्रजामि। अन्ति० ॥६॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Ashvins, harbingers of peace and appreciation, reward and pacify the poet, master of seven metres who, with his hope and imagination, captures the flames of fire and passion in poetry and let your protection and patronage be with us at the closest.