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जा॒म्य॑तीतपे॒ धनु॑र्वयो॒धा अ॑रुह॒द्वन॑म् । दृ॒षदं॑ जि॒ह्वयाव॑धीत् ॥

English Transliteration

jāmy atītape dhanur vayodhā aruhad vanam | dṛṣadaṁ jihvayāvadhīt ||

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Pad Path

जा॒मि । अ॒ती॒त॒पे॒ । धनुः॑ । व॒यः॒ऽधाः । अ॒रु॒ह॒त् । वन॑म् । दृ॒षद॑म् । जि॒ह्वया॑ । आ । अ॒व॒धी॒त् ॥ ८.७२.४

Rigveda » Mandal:8» Sukta:72» Mantra:4 | Ashtak:6» Adhyay:5» Varga:14» Mantra:4 | Mandal:8» Anuvak:8» Mantra:4


SHIV SHANKAR SHARMA

यज्ञ के लिये मनुष्य को नियोजित करता है।

Word-Meaning: - हे मनुष्यों ! यज्ञ के लिये (हविः) घृत, शाकल्य, समिधा और कुण्ड आदि वस्तुओं की (कृणुध्वम्) तैयारी करो। (आगमत्) इसमें सकल समाज आवे। (अध्वर्युः) मुख्य, प्रधान याजक (पुनः+वनते) पुनः-पुनः परमात्मा की कामना करे, जो (अस्य+प्रशासनम्) इस यज्ञ का प्रशासन=विधान (विद्वान्) जानते हैं, वे ईश्वर की कामना करें ॥१॥
Connotation: - यज्ञारम्भ के पूर्व समग्र सामग्री एकत्रित कर लोगों को बुला अध्वर्यु ईश्वर की स्तुति प्रार्थना प्रथम करे ॥१॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

दृषद्-वध

Word-Meaning: - [१] गतमन्त्र के अनुसार प्रभु का स्तवन करने पर (जामि धनुः) = हमें खा जानेवाला कामदेव का (धनुष् अतीतपे) = अतिशयेन तप्त होता है, अर्थात् कामदेव का धनुष हमें विद्ध नहीं कर पाता । ऐसा होने पर (वयोधाः) = आयुष्य का धारण करनेवाला सोम (वयनम् अरुहत्) = इस शरीरगृह में आरोहण करता है, अर्थात् सोम की ऊर्ध्वगति होती है। [२] यह स्तोता (जिह्वया) = जिह्वा प्रभव स्तुति के द्वारा (दृषदं) = पाषाण तुल्य दृढ़ वासनाओं को (अवधीत्) = विनष्ट करता है । वासना 'दृषत्' है [दृ+सद्] - हमारा विदारण करके भी बनी रहती है। स्तोता ही इसका वध कर पाता है।
Connotation: - भावार्थ - प्रभुस्तवन से कामदेव का धनुष सन्तप्त होकर भस्म हो जाता है। शरीर में सोम की ऊर्ध्वगति होती है। स्तुतिद्वारा वासनाओं का वध होता है।

SHIV SHANKAR SHARMA

यज्ञायाऽऽनियोजयति।

Word-Meaning: - हे मनुष्याः ! यज्ञार्थम्। हविः=हविरादि सर्वं वस्तु। कृणुध्वम्=संचिनुध्वम्। जनता। आगमत्=आगच्छतु। अध्वर्युः=प्रधानयाजकः। पुनः=पुनः। पुनः। वनते=वनतां=ईशमिच्छतु। यः। अस्य यज्ञस्य प्रशासनम्। विद्वान्=जानन् वर्तते ॥१॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Agni, immanent, friendly and rising as the sun, heats up the sky, bearing health and energy for nourishment, it rides the vapours of water and with its catalytic energy breaks the cloud.