400 बार पढ़ा गया
जा॒म्य॑तीतपे॒ धनु॑र्वयो॒धा अ॑रुह॒द्वन॑म् । दृ॒षदं॑ जि॒ह्वयाव॑धीत् ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
jāmy atītape dhanur vayodhā aruhad vanam | dṛṣadaṁ jihvayāvadhīt ||
पद पाठ
जा॒मि । अ॒ती॒त॒पे॒ । धनुः॑ । व॒यः॒ऽधाः । अ॒रु॒ह॒त् । वन॑म् । दृ॒षद॑म् । जि॒ह्वया॑ । आ । अ॒व॒धी॒त् ॥ ८.७२.४
400 बार पढ़ा गया
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:72» मन्त्र:4
| अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:14» मन्त्र:4
| मण्डल:8» अनुवाक:8» मन्त्र:4
शिव शंकर शर्मा
यज्ञ के लिये मनुष्य को नियोजित करता है।
पदार्थान्वयभाषाः - हे मनुष्यों ! यज्ञ के लिये (हविः) घृत, शाकल्य, समिधा और कुण्ड आदि वस्तुओं की (कृणुध्वम्) तैयारी करो। (आगमत्) इसमें सकल समाज आवे। (अध्वर्युः) मुख्य, प्रधान याजक (पुनः+वनते) पुनः-पुनः परमात्मा की कामना करे, जो (अस्य+प्रशासनम्) इस यज्ञ का प्रशासन=विधान (विद्वान्) जानते हैं, वे ईश्वर की कामना करें ॥१॥
भावार्थभाषाः - यज्ञारम्भ के पूर्व समग्र सामग्री एकत्रित कर लोगों को बुला अध्वर्यु ईश्वर की स्तुति प्रार्थना प्रथम करे ॥१॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
दृषद्-वध
पदार्थान्वयभाषाः - [१] गतमन्त्र के अनुसार प्रभु का स्तवन करने पर (जामि धनुः) = हमें खा जानेवाला कामदेव का (धनुष् अतीतपे) = अतिशयेन तप्त होता है, अर्थात् कामदेव का धनुष हमें विद्ध नहीं कर पाता । ऐसा होने पर (वयोधाः) = आयुष्य का धारण करनेवाला सोम (वयनम् अरुहत्) = इस शरीरगृह में आरोहण करता है, अर्थात् सोम की ऊर्ध्वगति होती है। [२] यह स्तोता (जिह्वया) = जिह्वा प्रभव स्तुति के द्वारा (दृषदं) = पाषाण तुल्य दृढ़ वासनाओं को (अवधीत्) = विनष्ट करता है । वासना 'दृषत्' है [दृ+सद्] - हमारा विदारण करके भी बनी रहती है। स्तोता ही इसका वध कर पाता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - प्रभुस्तवन से कामदेव का धनुष सन्तप्त होकर भस्म हो जाता है। शरीर में सोम की ऊर्ध्वगति होती है। स्तुतिद्वारा वासनाओं का वध होता है।
शिव शंकर शर्मा
यज्ञायाऽऽनियोजयति।
पदार्थान्वयभाषाः - हे मनुष्याः ! यज्ञार्थम्। हविः=हविरादि सर्वं वस्तु। कृणुध्वम्=संचिनुध्वम्। जनता। आगमत्=आगच्छतु। अध्वर्युः=प्रधानयाजकः। पुनः=पुनः। पुनः। वनते=वनतां=ईशमिच्छतु। यः। अस्य यज्ञस्य प्रशासनम्। विद्वान्=जानन् वर्तते ॥१॥
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Agni, immanent, friendly and rising as the sun, heats up the sky, bearing health and energy for nourishment, it rides the vapours of water and with its catalytic energy breaks the cloud.
