Go To Mantra
Viewed 373 times

उ॒रु॒ष्या णो॒ मा परा॑ दा अघाय॒ते जा॑तवेदः । दु॒रा॒ध्ये॒३॒॑ मर्ता॑य ॥

English Transliteration

uruṣyā ṇo mā parā dā aghāyate jātavedaḥ | durādhye martāya ||

Mantra Audio
Pad Path

उ॒रु॒ष्य । नः॒ । मा । परा॑ । दाः॒ । अ॒घ॒ऽय॒ते । ज॒त॒ऽवे॒दः॒ । दुः॒ऽआ॒ध्ये॑ । मर्ता॑य ॥ ८.७१.७

Rigveda » Mandal:8» Sukta:71» Mantra:7 | Ashtak:6» Adhyay:5» Varga:12» Mantra:2 | Mandal:8» Anuvak:8» Mantra:7


SHIV SHANKAR SHARMA

उसका महत्त्व दिखलाते हैं।

Word-Meaning: - हे अग्ने ! तू (यं+दाश्वांसम्) जिस दाता और उदार पुरुष का (त्रायसे) साहाय्य और रक्षा करता है, (तम्+मर्तम्) उस मर्त्य को (अरातयः) शत्रु और दुष्ट (रायः) कल्याणसम्पत्ति से (न+युवन्त) कोई भी पृथक् नहीं कर सकता ॥४॥
Connotation: - परमात्मा की कृपा जिस पर होती है, उसको कौन शक्ति कल्याण-मार्ग से पृथक् कर सकती है ॥४॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'अघायते दुराध्ये' मा परादाः

Word-Meaning: - [१] हे (जातवेदः) = सर्वज्ञ व सर्वधन प्रभो! आप (नः) = हमें (उरुष्य) = रक्षित करिये। [२] आप हमें (अघायते) = पाप की इच्छावाले (दुराध्ये) = दुष्ट ध्यानवाले-दुर्विचिन्तक मर्ताय पुरुष के लिए (मा परादाः) = मत दे डालिये। ऐसे पुरुषों के वश में हमें न करिये।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु की उपासना से इस जीवन संग्राम में हम दुष्ट विचारों से बचें तथा दुष्ट विचारवालों के वशीभूत भी न हो जायें।

SHIV SHANKAR SHARMA

तन्महत्त्वं दर्शयति।

Word-Meaning: - हे अग्ने ! अरातयः=शत्रवः। तं+मर्तं=मर्त्यम्। रायः=कल्याणधनात्। न+युवन्त=न पृथक् कर्तुं शक्नुवन्ति। यं+दाश्वांसं=दातारम्। त्वं त्रायसे ॥४॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - All pervasive, omniscient Agni, protect us and leave us not to the sinner, the criminal, and the man of evil thought and action.