Go To Mantra
Viewed 358 times

प्रप्र॑ वस्त्रि॒ष्टुभ॒मिषं॑ म॒न्दद्वी॑रा॒येन्द॑वे । धि॒या वो॑ मे॒धसा॑तये॒ पुरं॒ध्या वि॑वासति ॥

English Transliteration

pra-pra vas triṣṭubham iṣam mandadvīrāyendave | dhiyā vo medhasātaye puraṁdhyā vivāsati ||

Mantra Audio
Pad Path

प्रऽप्र॑ । वः॒ । त्रि॒ऽस्तुभ॑म् । इष॑म् । म॒न्दत्ऽवी॑राय । इन्द॑वे । धि॒या । वः॒ । मे॒धऽसा॑तये । पु॒र॒म्ऽध्या । आ । वि॒वा॒स॒ति॒ ॥ ८.६९.१

Rigveda » Mandal:8» Sukta:69» Mantra:1 | Ashtak:6» Adhyay:5» Varga:5» Mantra:1 | Mandal:8» Anuvak:7» Mantra:1


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - पुनः उसी अर्थ को कहते हैं−(आतिथिग्वे) इस शरीर में नयन आदि (षड्) छः घोड़ों को (सचा+सनम्) साथ ही मैं प्राप्त करता हूँ। इसी प्रकार (इन्द्रोते) ईश्वरव्याप्त शरीर में (वधूमतः) बुद्धिरूप नारी सहित और (पूतक्रतौ) शुद्धकर्म शरीर में इन्द्रियगण प्राप्त हैं ॥१७॥
Connotation: - वारंवार इसलिये इस प्रकार का वर्णन आता है कि उपासक अपने इन्द्रियगणों को वश में करके इनसे पवित्र काम लेवे ॥१७॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'त्रिष्टुभम्' इषम्

Word-Meaning: - [१] (मन्दद् वीराय) = वीरों को आनन्दित करनेवाले (इन्दवे) = परमैश्वर्यशाली प्रभु के लिए (वः) = तुम्हारी (त्रिष्टुभं) = 'काम, क्रोध, लोभ' तीनों को समाप्त करनेवाली [त्रिष्टुभ्] (इषं) = इच्छा को (प्र प्र) = प्रकर्षेण प्रकट करो, प्रभु के प्रति अपनी इसी इच्छा को प्रकट करो कि प्रभु हमें 'काम, क्रोध व लोभ' से ऊपर उठाएँ। [२] उपर्युक्त इच्छा के प्रबल होने पर वे प्रभु (वः) = तुम्हारे (मेधसातये) = यज्ञों के संभजन के लिए इसलिए कि तुम्हारी वृत्ति यज्ञात्मक बने, (पुरन्ध्या) = शरीररूप पुरी का धारण करनेवाली (धिया) = बुद्धि से (आविवासति) = तुम्हें सत्कृत करता है।
Connotation: - भावार्थ- जब हम प्रभु के प्रति इस कामना को प्रकट करते हैं कि हम 'काम, क्रोध, लोभ' को जीत पाएँ, तो प्रभु हमें यज्ञशील बनने के लिए पालक बुद्धि प्राप्त कराते हैं।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - पुनस्तमर्थमाह−आतिथिग्वे। षड्+अश्वान्=इन्द्रियरूपान्। सचा=सह। सनम्। प्राप्तवानस्मि। इन्द्रोते। वधूमतः=बुद्धिमतः। पूतक्रतौ=शुद्धकर्म्मणि ॥१७॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - For your progress, offer libations of holy fuel and fragrance, triple refined and intensified, with trishtubh hymns of Vedic formulae in the service of Indra, cosmic spirit of energy and power, happy and exciting, who inspires the brave and shines you with versatile creative intellect for the advancement of your science of yajna for further development.