Viewed 305 times
अ॒स्माकं॒ सु रथं॑ पु॒र इन्द्र॑: कृणोतु सा॒तये॑ । न यं धूर्व॑न्ति धू॒र्तय॑: ॥
English Transliteration
Mantra Audio
asmākaṁ su ratham pura indraḥ kṛṇotu sātaye | na yaṁ dhūrvanti dhūrtayaḥ ||
Pad Path
अस्माक॒म् । सु । रथ॑म् । पु॒रः । इन्द्रः॑ । कृ॒णो॒तु॒ । सा॒तये॑ । न । यम् । धूर्व॑न्ति । धू॒र्तयः॑ ॥ ८.४५.९
Rigveda » Mandal:8» Sukta:45» Mantra:9
| Ashtak:6» Adhyay:3» Varga:43» Mantra:4
| Mandal:8» Anuvak:6» Mantra:9
SHIV SHANKAR SHARMA
Word-Meaning: - (उत) और (मघवन्) हे धनसंयुक्त आत्मन् ! (त्वम्+शृणु) तू यह सुन (यत्) जो वस्तु (ते) तुझसे उपासक (वष्टि) चाहता है, (तत्) उस वस्तु को (ववक्षि) उसके लिये ले आता है, (यद्+वीळयासि) जिसको तू दृढ़ करता है (तत्+वीळु) वह दृढ़ ही होता है ॥६॥
Connotation: - यह समस्त वर्णन सिद्ध जितेन्द्रिय आत्मा का है, यह ध्यान रखना चाहिये। भाव इसका यह है कि यदि आत्मा वश में हो और ईश्वरीय नियमवित् हो, तो उस आत्मा से कौन वस्तु प्राप्त नहीं होती। लोग आत्मा को नहीं जानते, अतः वे स्वयं दरिद्र बने रहते हैं। हे उपासको ! स्व आत्मा को पहिचानो ॥६॥
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
कैसा रथ ?
Word-Meaning: - [१] (इन्द्रः) = सब शत्रुओं का विद्रावण करनेवाले प्रभु (अस्माकं) = हमारे (सु-रथं) = उत्तम रथ को (पुरः कृणोतु) = आगे करें। यह रथ शत्रुओं की ओर आक्रमण के लिए आगे ही बढ़े। (सातये) = यह सब धनों की प्राप्ति के लिए हो। 'काम' को पराजित करके हम 'स्वास्थ्य-धन' को प्राप्त करें। 'क्रोध' को जीतकर हम 'मानसशान्तिरूप धन' को प्राप्त करें। 'लोभ' को जीतकर हम 'ज्ञान धन' को प्राप्त करें। [२] हमारा यह रथ ऐसा हो कि (यं) = जिसे (धूर्तयः) = हिंसक शत्रु (न धूर्वन्ति) = हिंसित नहीं कर पायें। हो।
Connotation: - भावार्थ- हमारा शरीर रथ आगे और आगे बढ़े। यह सब धनों का विजय करनेवाला किसी से हिंसित न हो।
SHIV SHANKAR SHARMA
Word-Meaning: - उत=अपि च। हे मघवन् ! धनवन् आत्मन् ! त्वमिदं शृणु। ते=त्वत्तः। यद् वष्टि=कामयते। तत् त्वम्। ववक्षि=तस्मै तद् वहसि। त्वं यद् वस्तु। वीळयासि=दृढीकरोषि। तद्वीळु तद् दृढमेव सर्वत्र भवतीत्यर्थः ॥६॥
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - May Indra, mighty warring soul, turn our chariot of body and the body politic to the heights of the first and foremost order of strength and excellence for the achievement of success and victory in the battle of life so that no enemies can violate it.
