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यद्वी॒ळावि॑न्द्र॒ यत्स्थि॒रे यत्पर्शा॑ने॒ परा॑भृतम् । वसु॑ स्पा॒र्हं तदा भ॑र ॥

English Transliteration

yad vīḻāv indra yat sthire yat parśāne parābhṛtam | vasu spārhaṁ tad ā bhara ||

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Pad Path

यत् । वी॒ळौ । इ॒न्द्र॒ । यत् । स्थि॒रे । यत् । पर्शा॑ने । परा॑ऽभृतम् । वसु॑ । स्पा॒र्हम् । तत् । आ । भ॒र॒ ॥ ८.४५.४१

Rigveda » Mandal:8» Sukta:45» Mantra:41 | Ashtak:6» Adhyay:3» Varga:49» Mantra:6 | Mandal:8» Anuvak:6» Mantra:41


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - (वृषभ) हे सकलमनोरथपूरक महादेव ! हमारे इस (एवारे) परमप्रिय (सुते) शुभकर्म में (भूरि) बहुत धन (असिन्वन्) देता हुआ तू (आवयः) आ। (इव) जैसे (निवता+चरन्) द्यूत खेलता हुआ (श्वघ्नी) कितव=जुआरी सभास्थान में आता है ॥३८॥
Connotation: - परमात्मा सकलमनोरथदाता होने के कारण वृषभ कहाता है। अतः हे मनुष्यों ! उसी की सेवा करो और उसी से अपनी आकाङ्क्षित वस्तु माँगो ॥३८॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

वीडौ-स्थिरे-पर्शाने

Word-Meaning: - [१] हे (इन्द्र) = परमैश्वर्यशालिन् प्रभो ! (यत्) = जो (स्पाईं वसु) = स्पृहणीय धन (वीडौ) = दृढ़ शरीरवाले बलवान् पुरुष में है, (यत्) = जो धन (स्थिरे) = स्थिरवृत्तिवाले, स्थितप्रज्ञ मनुष्य में हैं और (यत्) = जो धन (पर्शाने) = विचारशील पुरुष में (पराभृतम्) = धारण किया गया है, (तद्) = उस धन को (आभर) = हमारे लिए प्राप्त कराइये।
Connotation: - भावार्थ- हम सबल शरीरवाले, स्थिरवृत्तिवाले व विचारशील बनें और स्पृहणीय धन को प्राप्त करें।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे वृषभ=कामानां वर्षितरिन्द्र ! एवारे=परमप्रिये। अस्माकम्। सुते=शुभकर्मणि। भूरि=भूरीणि=बहूनि धनानि। असिन्वन्=अबध्नन्। ददत् सन्। आवयः=आगच्छ। अत्र दृष्टान्तः। निवता=द्यूतेन। चरन्। श्वघ्नीव=यथा कितवः। सभास्थानमागच्छति ॥३८॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Whatever wanted wealth hidden in solid mountains, concealed in secret and trust worthy sources or covered in caverns and deep in the clouds, bring that out in the open for the society.