Go To Mantra
Viewed 375 times

भि॒न्धि विश्वा॒ अप॒ द्विष॒: परि॒ बाधो॑ ज॒ही मृध॑: । वसु॑ स्पा॒र्हं तदा भ॑र ॥

English Transliteration

bhindhi viśvā apa dviṣaḥ pari bādho jahī mṛdhaḥ | vasu spārhaṁ tad ā bhara ||

Mantra Audio
Pad Path

भि॒न्धि । विश्वाः॑ । अप॑ । द्विषः॑ । परि॑ । बाधः॑ । ज॒हि । मृधः॑ । वसु॑ । स्पा॒र्हम् । तत् । आ । भ॒र॒ ॥ ८.४५.४०

Rigveda » Mandal:8» Sukta:45» Mantra:40 | Ashtak:6» Adhyay:3» Varga:49» Mantra:5 | Mandal:8» Anuvak:6» Mantra:40


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - (मर्य्याः) हे मनुष्यों ! (कः+नु) कौन (सखा) मित्र (अमिथितः) अबाधित होने पर भी अर्थात् निष्कारण (सखायम्) अपने मित्र को (अब्रवीत्) कहता है अर्थात् मित्र के ऊपर दोषारोपण करता है, (कः) कौन कृतघ्न मित्र अपने मित्र को आपत्ति में (जहा) छोड़ता है और कौन कहता है कि (अस्मत्) हमको छोड़कर हमसे दूर (ईषते) मित्र भाग गया है ॥३७॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'द्विषः, बाधः, मृधः ' अपजहि

Word-Meaning: - [१] हे प्रभो! आप (विश्वाः) = सब, हमारे अन्दर प्रविष्ट हो जानेवाली (द्विषः) = द्वेष की भावनाओं को (अपभिन्धि) = सुदूर विदीर्ण करिये। (बाधः) = हमें बाधा पहुँचानेवाली इन वासनाओं को (परि जहि) = सर्वथा नष्ट कर दीजिए (मृध:) = हमारा विनाश [हिंसन] करनेवाली वृत्तियों को भी विनष्ट करिये। [२] इसप्रकार हमें द्वेष व वासनाओं से रहित करके (तत्) = उस प्रसिद्ध (स्पाईं) = स्पृहणीय (वसु) = धन को (आभर) = सर्वथा प्राप्त कराइये।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु हमें द्वेष, वासना व हिंसक शत्रुओं से बचाकर स्पृहणीय धन को प्राप्त कराएँ।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे मर्याः=हे मनुष्याः। को नु=कः खलु। सखा। अमिथितः=अबाधितः=अपराधरहितोऽपि सन्। स्वकीयम्। सखायम्=मित्रम्। अब्रवीत्=कथयति। दोषारोपणं करोति। कः खलु=सखायम्। जहा=जहाति त्यजति दुःखे। कश्च अस्मत्। ईषते=पलायत इति ब्रवीति ॥३७॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Break off all the jealous adversaries, remove all obstacles, eliminate the enemies and violence and fill the world with cherished wealth, honour and prosperity.