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यु॒क्ष्वा हि त्वं र॑था॒सहा॑ यु॒वस्व॒ पोष्या॑ वसो । आन्नो॑ वायो॒ मधु॑ पिबा॒स्माकं॒ सव॒ना ग॑हि ॥

English Transliteration

yukṣvā hi tvaṁ rathāsahā yuvasva poṣyā vaso | ān no vāyo madhu pibāsmākaṁ savanā gahi ||

Pad Path

यु॒क्ष्व । हि । त्वम् । र॒थ॒ऽसहा॑ । यु॒वस्व॑ । पोष्या॑ । व॒सो॒ इति॑ । आत् । नः॒ । वा॒यो॒ इति॑ । मधु॑ । पि॒ब॒ । अ॒स्माक॑म् । सव॑ना । आ । ग॒हि॒ ॥ ८.२६.२०

Rigveda » Mandal:8» Sukta:26» Mantra:20 | Ashtak:6» Adhyay:2» Varga:29» Mantra:5 | Mandal:8» Anuvak:4» Mantra:20


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SHIV SHANKAR SHARMA

सेनानायक का कर्त्तव्य कहते हैं।

Word-Meaning: - (वायो) हे सेनानायक ! (त्वं+हि+रथासहा) आप रथयोग्य घोड़ों को रथ में (युक्ष्व) जोड़ो। (वसो) हे अपने पुरुषार्थ से सबको वास देनेहारे सेनापते ! (पोष्या) पोष पालकर शिक्षित किये हुए घोड़ों को (युवस्व) संग्राम में लगाओ (आत्+नः+मधु+पिब) तब संग्रामों में विजयलाभ के पश्चात् हम लोगों के दिये हुए मधुर पदार्थ और सत्कार ग्रहण करें और (सवना+आगहि) प्रत्येक शुभकर्म में आवें ॥२०॥
Connotation: - जब सेनापति नाना विजय कर आवें, तब उनका पूरा सत्कार हो और प्रत्येक शुभकर्म में वे बुलाये जाएँ ॥२०॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

शुद्ध वायु के सम्पर्क के लाभ

Word-Meaning: - [१] 'वायु' ही प्राणरूप होकर नासिका में प्रवेश करता है। सो अब वायु से आराधना करते हैं कि हे वायो ! (त्वम्) = तू (हि) = निश्चय से (रथासहा) = शरीर- रथ के वहन में समर्थ इन्द्रियाश्वों को (युक्ष्वा) = शरीर-रथ में जोत । हे (वसो) = वसानेवाले वायुदेव ! तू (पोष्या) = उत्तम पोषणवाले दृढ़ अंगों को (युवस्व) = इस शरीर में मिश्रित कर [मिला]। इस शरीर रथ का एक-एक अंग दृढ़ हो । [२] (आत्) = अब, हे वायो ! (नः) = हमारे (मधु) = सब ओषधियों के सारभूत, भोजन से रस-रुधिर आदि क्रम से उत्पन्न हुए हुए अत्यन्त सारभूत सोम को तू (पिब) = पी, शरीर में ही व्याप्त कर। (अस्माकम्) = हमारे (सवना) = जीवन के 'प्रातः, मध्याह्न व सायं' के तीनों सवनों में (आगहि) = तू हमें प्राप्त हो। हम सदा शुद्ध वायु के सम्पर्क में होते हुए तीनों सवनों में सोम का पान करें, वीर्य का रक्षण करें।
Connotation: - भावार्थ- शुद्ध वायु का सम्पर्क, शुद्ध वायु में होनेवाला प्राणायाम, हमारी इन्द्रियों को सशक्त बनाये, अंगों को दृढ़ करे, सोम को शरीर में सुरक्षित करे तथा दीर्घजीवन प्राप्त कराये।
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SHIV SHANKAR SHARMA

सेनानायककर्त्तव्यमाह।

Word-Meaning: - हे वायो=सेनानायक ! वायुरिह सेनानायकः। त्वं हि। रथासहा=रथयोग्यौ। अश्वौ। रथे। युक्ष्व=योजय। हे वसो=वासक ! पोष्या=पोषणीयौ अश्वौ। युवस्व=संग्रामेषु मिश्रय। आत्=अनन्तरम्। नः=अस्माकम्। मधु। पिब अस्माकम्। सवना=सवनानि। आगहि=आगच्छ ॥२०॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O Vayu, vibrant motive power of nature and humanity, harness your strong chariot horses and, O Vasu, giver of peaceful home and settlement with security, yoke them to social good. Come, join our corporate yajna of social development, taste and celebrate the joy of our achievement.$(This mantra may be applied to the head of the forces of law and order for internal security and the commander of defence forces for security against external forces.)