Go To Mantra
Viewed 371 times

तदि॒न्द्राव॒ आ भ॑र॒ येना॑ दंसिष्ठ॒ कृत्व॑ने । द्वि॒ता कुत्सा॑य शिश्नथो॒ नि चो॑दय ॥

English Transliteration

tad indrāva ā bhara yenā daṁsiṣṭha kṛtvane | dvitā kutsāya śiśnatho ni codaya ||

Pad Path

तत् । इ॒न्द्र॒ । अवः॑ । आ । भ॒र॒ । येन॑ । दं॒सि॒ष्ठ॒ । कृत्व॑ने । द्वि॒ता । कुत्सा॑य । शि॒श्न॒थः॒ । नि । चो॒द॒य॒ ॥ ८.२४.२५

Rigveda » Mandal:8» Sukta:24» Mantra:25 | Ashtak:6» Adhyay:2» Varga:19» Mantra:5 | Mandal:8» Anuvak:4» Mantra:25


SHIV SHANKAR SHARMA

उसकी प्रार्थना दिखलाते हैं।

Word-Meaning: - (इन्द्र) हे ईश ! (दंसिष्ठ) हे परमाद्भुत ! हे परम दर्शनीय ! हे सर्वविघ्नविनाशक ! तू (तत्+अवः) यह सहायता और रक्षा हम लोगों को (आभर) दे, जिससे (कृत्वने) कर्म करनेवाले (कुत्साय) जगत् के कुकर्मों की निन्दा करनेवाले संसार के दोषों को दिखलानेवाले ऋषि के लिये (द्विता) दो प्रकार के शारीरिक और मानसिक शत्रुओं को (शिश्नथः) हनन करता, उसी रक्षा की (निचोदय) सर्वत्र प्रेरणा कर ॥२५॥
Connotation: - जैसे ईश्वर समदृष्टि है, वैसे यथासम्भव हम भी होवें ॥२५॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

प्रभु-रक्षण के द्वारा ज्ञान व शक्ति का विस्तार

Word-Meaning: - [१] हे (दंसिष्ठ) = शत्रुओं का उपक्षय करनेवाले (इन्द्र) = सर्वशक्तिमन् प्रभो ! (येन) = जिस रक्षण के द्वारा आप (कृत्वने) = कर्त्तव्य कर्मों को करनेवाले पुरुष का पालन करते हैं, (तद् अवः) = उस रक्षण को हमारे लिये (आभर) = प्राप्त कराइये। [२] आप अपने रक्षण के द्वारा (कुत्साय) = वासनाओं का संहार करनेवाले इस पुरुष के लिये द्विता ज्ञान व शक्ति के विस्तार के हेतु से [ द्वौ तनोति ] (शिश्नथः) = शत्रुओं का संहार करते हैं। शत्रुओं के संहार के द्वारा उसके ज्ञान व सामर्थ्य का वर्धन करते हैं। हमारे लिये भी उस रक्षण को (नि चोदय) = नितरां प्रेरित करिये। आप के इस रक्षण के द्वारा हम शत्रुओं से अनाक्रान्त होकर ज्ञान व शक्ति का वर्धन कर पायें।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु कर्त्तव्यपरायण व्यक्ति का रक्षण करते हैं। वासनाओं का संहार करनेवाला पुरुष प्रभु-रक्षण को प्राप्त करता है। प्रभु से रक्षित व्यक्ति वासनाओं से आक्रान्त न होकर ज्ञान व शक्ति का विस्तार कर पाता है।

SHIV SHANKAR SHARMA

तस्य प्रार्थनां दर्शयति।

Word-Meaning: - हे इन्द्र=हे ईश ! हे दंसिष्ठ=परमाद्भुत ! परमदर्शनीय ! परमविघ्नविनाशक देव ! तदवः=तद्रक्षणम्। अस्मभ्यम्। आभर। येन रक्षणेन। कृत्वने=कर्म कुर्वते। कुत्साय=जगन्निन्दकाय ऋषये। द्विता=द्विविधान् शत्रून्। शिश्नथः=हंसि। तदेव पालनम्। सर्वत्र निचोदय=नितरां प्रेरय ॥२५॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, wondrous lord of beauty and glory, bring us that protection and immunity by which you protect the active sage of holy action against negativities and destroy the twofold mental and physical ailments of humanity. We pray, O lord, inspire and activate those internal and natural defences of good health.