Go To Mantra
Viewed 353 times

उ॒च्छन्नु॒षस॑: सु॒दिना॑ अरि॒प्रा उ॒रु ज्योति॑र्विविदु॒र्दीध्या॑नाः । गव्यं॑ चिदू॒र्वमु॒शिजो॒ वि व॑व्रु॒स्तेषा॒मनु॑ प्र॒दिव॑: सस्रु॒राप॑: ॥

English Transliteration

ucchann uṣasaḥ sudinā ariprā uru jyotir vividur dīdhyānāḥ | gavyaṁ cid ūrvam uśijo vi vavrus teṣām anu pradivaḥ sasrur āpaḥ ||

Mantra Audio
Pad Path

उ॒च्छन् । उ॒षसः॑ । सु॒ऽदिनाः॑ । अ॒रि॒प्राः । उ॒रु । ज्योतिः॑ । वि॒वि॒दुः॒ । दीध्या॑नाः । गव्य॑म् । चि॒त् । ऊ॒र्वम् । उ॒शिजः॑ । वि । व॒व्रुः॒ । तेषा॑म् । अनु॑ । प्र॒ऽदिवः॑ । सस्रुः॑ । आपः॑ ॥ ७.९०.४

Rigveda » Mandal:7» Sukta:90» Mantra:4 | Ashtak:5» Adhyay:6» Varga:12» Mantra:4 | Mandal:7» Anuvak:6» Mantra:4


ARYAMUNI

Word-Meaning: - जो लोग उक्त वायुविद्यावेत्ता विद्वान् की संगति में रहते हैं, उनके (उषसः) प्रभातवेलाओं सहित (सुदिनाः) सुन्दर दिन (अरिप्राः) निष्पाप (उच्छन्) व्यतीत होते हैं और वे (दीध्यानाः) ध्यान करते हुए (उरु) सर्वोपरि (ज्योतिः) ज्योतिःस्वरूप ब्रह्म को जान लेते हैं और (प्रदिवः) द्युलोक (आपः) जलों की (सस्रुः) वृष्टि करते हैं तथा विद्वान् लोग (तेषाम्) उनको (अनुः, वव्रुः) सुन्दर उपदेश करते हैं ॥४॥
Connotation: - परमात्मा उपदेश करते हैं कि हे पुरुषो ! जो लोग वायुवत् सर्वत्र गतिशील विद्वानों की संगति में रहते हैं, उनके लिये सूर्योदयकाल सुन्दर प्रतीत होते हैं और उनके लिये सृवृष्टि और सम्पूर्ण ऐश्वर्य उपलब्ध होते हैं। बहुत क्या, योगी जनों की संगति करनेवाले पुरुष ध्यानावस्थित होकर उस परम ज्योति को उपलब्ध करते हैं, जिसका नाम परब्रह्म है ॥ तात्पर्य यह है कि विद्वानों की संगति के बिना उस पूर्णपुरुष का बोध कदापि नहीं हो सकता, इसलिये पुरुष को उचित है कि सदैव विद्वानों की संगति में रहे ॥४॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

छोटी उम्र में ईश्वर का ध्यान

Word-Meaning: - पदार्थ- जैसे (उषसः) = प्रभात वेलाएँ वा सूर्य की दाहक कान्तियें (सु-दिनाः उच्छन्) = उत्तम दिनवाली होकर प्रकट होती हैं, (अरि-प्राः) = पाप-रहित (दीध्यानाः) = देदीप्यमान, (उरु ज्योतिः विविदुः) = बहुत बड़े विशाल प्रकाशवान् सूर्य को प्राप्त करती (उशिजः) = कान्तियुक्त होकर (गव्यम् ऊर्वम् विवव्रुः) = रश्मियों के बड़े धन को फैलाती है (अनु प्रदिवः आपः सस्नुः) = अनन्तर आकाश से मेघ जल बरसते हैं वैसे ही (उषसः) = उषावत् जीवन के प्रारम्भ भाग में वर्त्तमान नर-नारीगण (सु-दिना) = शुभ दिन युक्त होकर (उच्छन्) = अपने गुण प्रकट करें और वे (दीध्यानाः) = ईश्वर ध्यान करते हुए (उरु ज्योतिः) = बड़ी भारी ज्ञान- ज्योति को (विविदुः) = प्राप्त करें। वे (उशिजः) = प्रीतियुक्त होकर (गव्यम् ऊर्वम्) = वेदवाणी के धन को (विवव्रुः) = विविध प्रकार से वितरण करें, उसकी व्याख्या करें। (तेषाम् अनु) = उनके पीछे-पीछे ही (प्र-दिवः) = उत्तम फल की कामनावाली (आपः) = आप्त प्रजाएँ (सत्रुः) = चलें।
Connotation: - भावार्थ- स्त्री-पुरुष जीवन के प्रारम्भ काल अर्थात् छोटी उम्र से ही ईश्वर का ध्यान किया करें। इससे उनमें ईश्वर का दिव्य तेज चमकने लगेगा तथा वे ब्रह्मचारी होकर वेदवाणी का स्वाध्याय प्रीतिपूर्वक करते हुए अन्यों के सामने वेद की विविध व्याख्याएँ प्रकट करके प्रजाओं को आप्त प्रजा बना सकेंगे।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (उषसः) वायुविद्यावेतृसङ्गतानां जनानां प्रभातकालेन सह (सुदिनाः) शोभनदिनानि (अरिप्राः) निष्पापानि (उच्छन्) वियन्ति, तथा च ते (दीध्यानाः) ध्यायन्तः (उरु) सर्वातिशायि (ज्योतिः) ज्योतिःस्वरूपं ब्रह्म जानन्ति, तथा (प्रदिवः) द्युलोकः (आपः) जलं (सस्रुः) वर्षति तथा (अनु) विद्वांसः (तेषाम्) तेभ्यः (अणुः वव्रुः) उपदिशन्ति ॥४॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Pure and immaculate lights of dawn arise and shine to bring in the happy day. Shining they collect and radiate vast light for the world, and, brilliant with beauty and living energy, they uncover and reveal the wealth of the earth and vast sky. Consequently the lights of dawn lead to radiations of light from the sun and the day’s activities follow and proceed.