Go To Mantra
Viewed 477 times

यं त्राय॑ध्व इ॒दमि॑दं॒ देवा॑सो॒ यं च॒ नय॑थ। तस्मा॑ अग्ने॒ वरु॑ण॒ मित्रार्य॑म॒न्मरु॑तः॒ शर्म॑ यच्छत ॥१॥

English Transliteration

yaṁ trāyadhva idam-idaṁ devāso yaṁ ca nayatha | tasmā agne varuṇa mitrāryaman marutaḥ śarma yacchata ||

Mantra Audio
Pad Path

यम्। त्राय॑ध्वे। इ॒दम्ऽइ॑दम्। देवा॑सः। यम्। च॒। नय॑थ। तस्मै॑। अ॒ग्ने॒। वरु॑ण। मित्र॑। अर्य॑मन्। मरु॑तः। शर्म॑। य॒च्छ॒त॒ ॥१॥

Rigveda » Mandal:7» Sukta:59» Mantra:1 | Ashtak:5» Adhyay:4» Varga:29» Mantra:1 | Mandal:7» Anuvak:4» Mantra:1


SWAMI DAYANAND SARSWATI

अब बारह ऋचावाले उनसठवें सूक्त का प्रारम्भ है, उसके प्रथम मन्त्र में फिर विद्वानों को क्या करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे (मरुतः) प्राणों के सदृश अग्रणी (देवासः) विद्वान् ! आप लोग (इदमिदम्) इस-इस वचन को सुनाय के वा कर्म करके (यम्) जिसको (नयथ) प्राप्त कराइये (यम्, च) और जिस मनुष्य की (त्रायध्वे) रक्षा करें (तस्मै) उसके लिये (शर्म) सुख वा गृह (यच्छत) दीजिये और हे (अग्ने) अग्नि के समान तेजस्वी (वरुण) श्रेष्ठ (मित्र) मित्र (अर्यमन्) न्यायकारी ! आप इन्हीं की सदा सेवा करिये ॥१॥
Connotation: - हे विद्वान् जनो ! आप लोग सत्य उपदेश, उत्तम शिक्षा और विद्या दान से सब मनुष्यों की उत्तम प्रकार रक्षा करके वृद्धि करिये, जिससे सब सुखी होवें ॥१॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सन्मार्ग पर चलो

Word-Meaning: - पदार्थ- हे (देवासः) = विद्वान् जनो! आप (यं त्रायध्वे) = जिसकी रक्षा करते हो और (यं च) = जिसको (इदम् इदम्) = यह सन्मार्ग है, यह सत् कृत्य है, ऐसा बतलाकर (नयथ च) = सन्मार्ग और सत्कर्म में ले जाते हो, हे (अग्ने) = विद्वन्! हे (वरुण) = श्रेष्ठ पुरुष ! हे (मित्र) = स्नेहवन् ! हे (अर्यमन्) = दुष्टों के नियन्तः ! हे (मरुतः) = विद्वान् प्रजाजनो! आप उसको अवश्य (शर्म यच्छत) = शान्ति प्रदान करो ।
Connotation: - भावार्थ- श्रेष्ठ विद्वान् प्रजाजनों को बुराइयों व दोषों से बचाकर उन्हें सत्कर्म व सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा करते हैं। इससे उन लोगों को अवश्य ही शान्ति प्राप्त होगी।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनर्विद्वद्भिः किं कर्तव्यमित्याह ॥

Anvay:

हे मरुतो देवासो ! यूयमिदमिदं यन्नयथ यं च त्रायध्ये तस्मै शर्म यच्छत, हे अग्ने वरुण मित्रार्यमँस्त्वमेतानेव सदा सेवस्व ॥१॥

Word-Meaning: - (यम्) (त्रायध्वे) रक्षथ (इदमिदम्) वचनं श्रावयिता कर्म कृत्वा वा (देवासः) प्राणा इव विद्वांसः (यम्) नरम् (च) (नयथ) प्रापयथ (तस्मै) (अग्ने) (वरुण) श्रेष्ठ (मित्र) सखे (अर्यमन्) न्यायकारिन् (मरुतः) प्राण इव नेतारः (शर्म) सुखं गृहं वा (यच्छत) दत्त ॥१॥
Connotation: - हे विद्वांसो ! भवन्तस्सत्योपदेशसुशिक्षाविद्यादानेन सर्वान् मनुष्यान् सम्यग्रक्षित्वा वर्धन्तु येन सर्वे सुखिनः स्युः ॥१॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O divine Maruts, vibrant, brilliant and generous leading lights, givers of enlightenment, whosoever you protect, defend and save and whosoever you lead at every step in every way by word and deed, for him, you all and, O Agni, sage and scholar giver of light, Varuna, man of judgement and discrimination, Mitra, enlightened friend, and Aryaman, man of justice and rectitude on the paths of life, you give a happy home, firm settlement and peace of mind.

MATA SAVITA JOSHI

या सूक्तात वायूच्या दृष्टान्ताने विद्वान व ईश्वराच्या गुण व कृत्याचे वर्णन असल्यामुळे या सूक्ताच्या अर्थाची पूर्व सूक्तार्थाबरोबर संगती जाणावी.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - हे विद्वानांनो ! तुम्ही सत्य उपदेश, उत्तम शिक्षण व विद्यादानाने सर्व माणसांचे उत्तम प्रकारे रक्षण करून उन्नती करा. ज्यामुळे सर्व सुखी व्हावेत. ॥ १ ॥