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अह॑श्च कृ॒ष्णमह॒रर्जु॑नं च॒ वि व॑र्तेते॒ रज॑सी वे॒द्याभिः॑। वै॒श्वा॒न॒रो जाय॑मानो॒ न राजावा॑तिर॒ज्ज्योति॑षा॒ग्निस्तमां॑सि ॥१॥

English Transliteration

ahaś ca kṛṣṇam ahar arjunaṁ ca vi vartete rajasī vedyābhiḥ | vaiśvānaro jāyamāno na rājāvātiraj jyotiṣāgnis tamāṁsi ||

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Pad Path

अहः॑। च॒। कृ॒ष्णम्। अहः॑। अर्जु॑नम्। च॒। वि। व॒र्ते॒ते॒ इति॑। रज॑सी॒ इति॑। वे॒द्याभिः॑। वै॒श्वा॒न॒रः। जाय॑मानः। न। राजा॑। अव॑। अ॒ति॒र॒त्। ज्योति॑षा। अ॒ग्निः। तमां॑सि ॥१॥

Rigveda » Mandal:6» Sukta:9» Mantra:1 | Ashtak:4» Adhyay:5» Varga:11» Mantra:1 | Mandal:6» Anuvak:1» Mantra:1


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SWAMI DAYANAND SARSWATI

अब सात ऋचावाले नवम सूक्त का प्रारम्भ है, उसके प्रथम मन्त्र में राजा प्रजा परस्पर कैसे वर्त्ताव करें, इस विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे मनुष्यो (अहः) दिन (कृष्णम्) रात्रि (च) और (अहः) व्याप्तिशील (अर्जुनम्) सरलगमन आदि गुणों को (च) भी (रजसी) रात्रिदिन (वेद्याभिः) जानने योग्यों के साथ (वि, वर्त्तेते) विविध प्रकार वर्त्तते हैं और (राजा) राजा के (न) समान (जायमानः) उत्पन्न हुआ (वैश्वानरः) सम्पूर्ण करने योग्य कामों में प्रकाशमान (अग्निः) अग्नि (ज्योतिषा) प्रकाश से (तमांसि) रात्रियों का (अव, अतिरत्) उल्लङ्घन करता है ॥१॥
Connotation: - इस मन्त्र में उपमालङ्कार है । जैसे रात्रिदिन संयुक्त हैं, वैसे ही राजा और प्रजा अनुकूल हों और जैसे सूर्य्य प्रकाश से अन्धकार को निवृत्त करता है, वैसे ही राजा विद्या और विनय के प्रकाश से अविद्यारूप अन्धकार को निवृत्त करे ॥१॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

दिन-रात के चक्र में प्रभु की महिमा

Word-Meaning: - [१] 'अहः' शब्द दिन का वाचक है। कृष्णा विशेषण लगाने पर यह रात्रि को भी प्रतिपादित करता है। (कृष्णं अह) = अन्धकार के कारण कृष्ण वर्णवाली यह रात्रि (च) = तथा (अर्जुनं अहः) = सूर्यकिरणों से उज्ज्वल श्वेत दिन (वेद्याभिः) = अनुकूलतया ज्ञातव्य अपनी प्रवृत्तियों से (रजसी) = सब लोकों का रञ्जन करते हुए (विवर्तेत) = पर्यावृत्त हो रहे हैं। चक्राकार गति में निरन्तर चलते हुए ये लोक-रञ्जन का कारण बन रहे हैं। दिन का प्रकाश हमें प्रबुद्ध करके कार्य प्रवृत्त करता है, तो थके हुए अंगों को विश्राम देने के लिये रात्रि का आगमन होता है। इस प्रकार दिन व रात दोनों मिलकर लोक-रञ्जन का साधन बनते हैं। [२] (वैश्वानरः) = वह सब नरों का हित करनेवाला प्रभु (राजा न) = एक शासक के समान (जायमान:) = इस दिन-रात के चक्र में अपनी महिमा के द्वारा प्रकट हो रहा है। अपने चक्र में घूमते हुए दिन-रात प्रभु की महिमा को प्रकट कर रहे हैं। प्रभु के शासन में ही ये चल रहे हैं। (अग्निः) = ये अग्रेणी प्रभु (ज्योतिषा) = अपनी ज्योति से (तमांसि) = अन्धकारों को (अवातिरत्) = विनष्ट करते हैं।
Connotation: - भावार्थ- दिन-रात के चक्र में प्रभु की महिमा व्यक्त हो रही है। प्रभु ही अपनी ज्योति से सब अन्धकारों को दूर करते हैं। सूर्य आदि में प्रभु की दीप्ति ही दीप्त हो रही है, जीवों के हृदयों को भी प्रभु ही रोशन करते हैं।
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SWAMI DAYANAND SARSWATI

अथ राजप्रजे परस्परं कथं वर्त्तेयातामित्याह ॥

Anvay:

हे मनुष्या ! अहः कृष्णं चाऽहरर्जुनं च रजसी वेद्याभिस्सह वि वर्त्तेते राजा न जायमानो वैश्वानरोऽग्निर्ज्योतिषा तमांस्यवातिरत् ॥१॥

Word-Meaning: - (अहः) दिनम् (च) (कृष्णम्) रात्रिः (अहः) व्याप्तिशीलम् (अर्जुनम्) ऋजुगत्यादिगुणम् (च) (वि) विरोधे (वर्त्तेते) (रजसी) रात्र्यहनी (वेद्याभिः) वेदितव्याभिः (वैश्वानरः) विश्वस्मिन् नरे नेतव्ये प्रकाशमानः (जायमानः) उत्पद्यमानः (न) इव (राजा) (अव) (अतिरत्) तरति (ज्योतिषा) प्रकाशेन (अग्निः) (तमांसि) रात्रीः ॥१॥
Connotation: - अत्रोपमालङ्कारः। यथा रात्रिदिने संयुक्ते वर्त्तेते तथैव राजप्रजे अनुकूले भवेतां यथा सूर्य्यः प्रकाशेनाऽन्धकारं निवर्त्तयति तथैव राजा विद्याविनयप्रकाशेनाऽन्धकारं निवर्त्तयेत् ॥१॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - The dark half of the earth’s daily round, the night, and the bright half, the day, revolve alternately in the terrestrial atmosphere alongwith their cognizable characteristics. Yaishvanara Agni, the sun, darling of the world, as it rises, overcomes and dispels the darkness with light like a ruler eliminating the dark and evil forces of society.
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ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

How should the rulers and their subjects deal with one another is told.

Anvay:

O men! one half of the day (night) is dark and the other one is bright which is endowed with straight movements and other qualities. Both day and night move on with (our. Ed.) knowledge and actions. The fire when kindled with its luster overcomes the darkness like the sun illuminating the world.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - There is simile used in the mantra. As day and night are associated with each other, so the king and his subjects should be agreeable to each other. As the sun dispels darkness by (its. Ed.) light, so a king should (also. Ed.) dispel the darkness of ignorance by the light of Vidya (knowledge) and humility.
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MATA SAVITA JOSHI

या सूक्तात दिवस व रात्र, अपत्य, जीव, परमेश्वराच्या स्थितीचे वर्णन असल्यामुळे या सूक्ताच्या अर्थाची पूर्व सूक्तार्थाबरोबर संगती जाणावी.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - या मंत्रात उपमालंकार आहे. जसे रात्र व दिवस संयुक्तपणे राहतात तसे राजा व प्रजा यांनी अनुकूलतेने वागावे. जसा सूर्यप्रकाशाने अंधकार नष्ट होतो तसे राजाने विद्या व विनयाने अविद्यारूपी अंधकार नष्ट करावा. ॥ १ ॥