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अ॒हं च॒न तत्सू॒रिभि॑रानश्यां॒ तव॒ ज्याय॑ इन्द्र सु॒म्नमोजः॑। त्वया॒ यत्स्तव॑न्ते सधवीर वी॒रास्त्रि॒वरू॑थेन॒ नहु॑षा शविष्ठ ॥७॥

English Transliteration

ahaṁ cana tat sūribhir ānaśyāṁ tava jyāya indra sumnam ojaḥ | tvayā yat stavante sadhavīra vīrās trivarūthena nahuṣā śaviṣṭha ||

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Pad Path

अ॒हम्। च॒न। तत्। सू॒रिऽभिः॑। आ॒न॒श्या॒म्। तव॑। ज्यायः॑। इ॒न्द्र॒। सु॒म्नम्। ओजः॑। त्वया॑। यत्। स्तव॑न्ते। स॒ध॒ऽवी॒र॒। वी॒राः। त्रि॒ऽवरू॑थेन। नहु॑षा। श॒वि॒ष्ठ॒ ॥७॥

Rigveda » Mandal:6» Sukta:26» Mantra:7 | Ashtak:4» Adhyay:6» Varga:22» Mantra:2 | Mandal:6» Anuvak:3» Mantra:7


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SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसी विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे (शविष्ठ) बलिष्ठ और (सधवीर) तुल्य स्थान में वर्त्तमान वीर जन (इन्द्र) सुख के देनेवाले ! (वीराः) वीर (नहुषा) मनुष्य विद्वान् (यत्) जिसकी (स्तवन्ते) प्रशंसा करते हैं (तत्) उसको (त्रिवरूथेन) तीन प्रकार के शीत, उष्ण और वर्षा में सुखकारक गृह जिनके उन (त्वया) आपके और (सूरिभिः) विद्वानों के साथ (अहम्) मैं (आनश्याम्) प्राप्त होऊँ और (चन) भी (तव) आपका जो (ज्यायः) प्रशंसा करने योग्य (सुम्नम्) सुख और (ओजः) पराक्रम है, उसको प्राप्त होऊँ ॥७॥
Connotation: - जो विद्वानों के सङ्ग से पुरुषार्थी होकर प्रशंसा करने योग्य, धर्मयुक्त कर्म को करते हैं, वे बली होकर उत्तम सुख को प्राप्त होते हैं ॥७॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सुम्नम् ओजः

Word-Meaning: - [१] हे (इन्द्र) = परमात्मन् ! (अहं चन) = मैं भी (सूरिभिः) = ज्ञानी स्तोताओं के साथ (तव) - आपके (तत्) = उस (ज्यायः) = उत्कृष्ट (सुम्नम्) = स्तोत्र व (ओजः) = बल को (आनश्याम्) = प्राप्त करूँ । ज्ञानी स्तोताओं के सम्पर्क में रहता हुआ मैं भी आपका स्तवन करनेवाला बनूँ और यह स्तवन मुझे ओजस्विता प्रदान करे। [२] हे (सधवीर) = सदा वीरों के साथ निवास करनेवाले [नायमात्मा बलहीनेन लभ्यः] (शविष्ठ) = बलवत्तम प्रभो ! (यत्) = क्योंकि (वीराः) = वीर पुरुष (त्रिवरूथेन) = शरीर, मन व मस्तिष्क इन तीनों की सम्पत्ति को देनेवाले (नहुषा) = [णह बन्धने] उपासकों को परस्पर स्नेह बन्धन में बाँधनेवाले (त्वया) = आपके द्वारा ही दिये हुए ओज का (स्तवन्ते) = स्तवन-प्रशंसन करते हैं। आप से दिये गये ओज से ही वस्तुतः ओजस्विता व वीरता प्राप्त होती है ।
Connotation: - भावार्थ-स्तोता पुरुषों के सम्पर्क में हम भी स्तवन की वृत्तिवाले बनते हुए प्रभु से 'सुम्न व ओज' को प्राप्त करें ।
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SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तमेव विषयमाह ॥

Anvay:

हे शविष्ठ सधवीरेन्द्र ! वीरा नहुषा विद्वांसो यत्स्तवन्ते तत्त्रिवरूथेन त्वया सूरिभिश्च सहाऽहमानश्यां चनाऽपि तव यज्ज्यायः सुम्नमोजोऽस्ति तदानश्याम् ॥७॥

Word-Meaning: - (अहन्) (चन) अपि (तत्) (सूरिभिः) विद्वद्भिः सह (आनश्याम्) प्राप्नुयाम् (तव) (ज्यायः) प्रशस्यम् (इन्द्र) सुखप्रद (सुम्नम्) सुखम् (ओजः) पराक्रमः (त्वया) (यत्) (स्तवन्ते) प्रशंसन्ति (सधवीर) समानस्थाने वर्त्तमान वीरपुरुष (वीराः) (त्रिवरूथेन) त्रीणि त्रिविधानि शीतोष्णवर्षासुखकराणि वरूथानि गृहाणि यस्य तेन (नहुषा) मनुष्याः (शविष्ठ) बलिष्ठ ॥७॥
Connotation: - ये विदुषां सङ्गेन पुरुषार्थिनो भूत्वा प्रशंसनीयं धर्म्यं कर्म कुर्वन्ति ते बलिनो भूत्वोत्तमं सुखं लभन्ते ॥७॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, bravest lord of the house of the brave, I pray, may I too, along with the learned and the wise and great, attain that high order of vigour and splendour, peace and well being, with the grace of your presence bestowed by you, lord of three worlds, which the brave and learned people value, admire and pray for.
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ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The same subject is continued.

Anvay:

O mightiest king (bestower of happiness) ! living with us let me enjoy that state which is glorified with brave thoughtful enlightened persons, with you who have houses comfortable in winter, summer, and rainy seasons and along with other scholars. Let me also enjoy that admirable delight and strength.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - Those persons enjoy very good happiness who with the association of the enlightened persons, perform righteous and admirable actions being industrious.
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MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - जे विद्वानांच्या संगतीने पुरुषार्थी बनून प्रशंसा करण्यायोग्य धर्मयुक्त कर्म करतात ते बलवान बनून उत्तम सुख प्राप्त करतात. ॥ ७ ॥