Go To Mantra

भ॒रद्वा॑जाय स॒प्रथः॒ शर्म॑ यच्छ सहन्त्य। अग्ने॒ वरे॑ण्यं॒ वसु॑ ॥३३॥

English Transliteration

bharadvājāya saprathaḥ śarma yaccha sahantya | agne vareṇyaṁ vasu ||

Mantra Audio
Pad Path

भ॒रत्ऽवा॑जाय। स॒ऽप्रथः॑। शर्म॑। य॒च्छ॒। स॒ह॒न्त्य॒। अग्ने॑। वरे॑ण्यम्। वसु॑ ॥३३॥

Rigveda » Mandal:6» Sukta:16» Mantra:33 | Ashtak:4» Adhyay:5» Varga:27» Mantra:3 | Mandal:6» Anuvak:2» Mantra:33


Reads 415 times

SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर राजा को क्या करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे (सहन्त्य) शान्त जनों में हुए (अग्ने) दाता जन ! आप (भरद्वाजाय) विज्ञान और अन्न को धारण किये हुए जन के लिये (सप्रथः) प्रसिद्धि के सहित वर्त्तमान (शर्म) गृह को और (वरेण्यम्) स्वीकार करने योग्य (वसु) द्रव्य को (यच्छ) दीजिये ॥३३॥
Connotation: - हे श्रेष्ठ गृहस्थ ! आप सदा ही सुपात्र धार्मिकजन के लिये दान दीजिये ॥३३॥
Reads 415 times

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

शर्म+वसु [सप्रथ: शर्म, वरेण्यं वसु]

Word-Meaning: - [१] हे (सहन्त्य) = शत्रुओं का अभिभव करनेवालों में उत्तम प्रभो! आप (भरद्वाजाय) = अपने में शक्ति का भरण करनेवाले के लिये (सप्रथः शर्म) = दिन प्रतिदिन विस्तारवाले सुख को (यच्छ) = दीजिये। शत्रुओं के अभिभव द्वारा ही शक्ति का रक्षण होता है। शक्तिरक्षण से ही सुख-वृद्धि होती है । [२] हे (अग्ने) = अग्रेणी प्रभो! (वरेण्यं वसु) = वरने योग्य धनों को प्राप्त कराइये । जो धन विलास का कारण बनता है, वह कभी वरेण्य नहीं होता।
Connotation: - भावार्थ– हे प्रभो! आप शक्ति को अपने में भरनेवाले के लिये विस्मृत होते हुए सुख को तथा वरणीय वसु [धन] को दीजिये ।
Reads 415 times

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुना राज्ञा किं कर्त्तव्यमित्याह ॥

Anvay:

हे सहन्त्यग्ने ! त्वं भरद्वाजाय सप्रथः शर्म्म वरेण्यं वसु च यच्छ ॥३३॥

Word-Meaning: - (भरद्वाजाय) धृतविज्ञानाऽन्नाय (सप्रथः) प्रख्यात्या सह वर्त्तमानः (शर्म) गृहम् (यच्छ) देहि (सहन्त्य) सहन्तेषु शान्तेषु भव (अग्ने) दातः (वरेण्यम्) स्वीकर्त्तुमर्हम् (वसु) द्रव्यम् ॥३३॥
Connotation: - हे सद्गृहस्थ ! त्वं सदैव सुपात्राय धार्मिकाय जनाय दानं देहि ॥३३॥
Reads 415 times

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Agni, lord of power and forbearance, give a spacious and comfortable home and security to the person who commands knowledge and means of service and sustenance for the society.
Reads 415 times

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

What should a king do is again told.

Anvay:

O donor of peaceful nature! you who are renowned, grant a man who upholds true knowledge and food materials, a good shelter and desirable wealth.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - O good householder! give donation to a man who deserves it well, being a righteous person.
Reads 415 times

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - हे सद्गृहस्था ! तू सदैव सुपात्र धार्मिक लोकांना दान दे. ॥ ३३ ॥