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हि यो मानु॑षा यु॒गा सीद॒द्धोता॑ क॒विक्र॑तुः। दू॒तश्च॑ हव्य॒वाह॑नः ॥२३॥

English Transliteration

sa hi yo mānuṣā yugā sīdad dhotā kavikratuḥ | dūtaś ca havyavāhanaḥ ||

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Pad Path

सः। हि। यः। मानु॑षा। यु॒गा। सीद॑त्। होता॑। क॒विऽक्र॑तुः। दू॒तः। च॒। ह॒व्य॒ऽवाह॑नः ॥२३॥

Rigveda » Mandal:6» Sukta:16» Mantra:23 | Ashtak:4» Adhyay:5» Varga:25» Mantra:3 | Mandal:6» Anuvak:2» Mantra:23


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SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर वह अग्नि कैसा है, इस विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - (यः) जो (हव्यवाहनः) हनव किये गये द्रव्यों को प्राप्त कराने पहुँचानेवाला और (दूतः) दूतवत् वर्त्तमान (च) भी अग्नि (मानुषा) मनुष्य-सम्बन्धी (युगा) वर्ष वा वर्षसमुदायों को (सीदत्) प्राप्त होता है (सः) (हि) वही (होता) दाता (कविक्रतुः) बड़ा विद्वान् जैसे वैसे कार्य का साधक होता है ॥२३॥
Connotation: - इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जो अग्नि धार्मिक और विद्वानों के कार्य्यों का करनेवाला होता है, उसको विद्वान् जन कार्य्यों की सिद्धि के लिये सम्प्रयुक्त करें ॥२३॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

दूतः-हव्यवाहनः

Word-Meaning: - [१] (सः) = वह प्रभु (हि) = ही (मानुषा युगा) = मानव युग्यों में, पति-पत्नी में (सीदत्) = आसीन हो [सीदतु] (यः) = जो (होता) = सब जीवन-यज्ञ के साधनभूत पदार्थों का दाता है और (कविक्रतुः) = क्रान्तप्रज्ञ है। [२] वह निरतिशय ज्ञानवाला प्रभु (दूतः) = ज्ञान का संदेश देनेवाला है, (च) = और (हव्यवाहनः) = सब हव्य पदार्थों का देनेवाला है।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु के तेज के अंश से युक्त हुए हुए ही पति-पत्नी यज्ञादि उत्तम कर्मों में प्रवृत्त होते हैं और अपने ज्ञान का वर्धन करनेवाले होते हैं। प्रभु ही हमें ज्ञान का सन्देश देते हैं और सब हव्य पदार्थों को प्राप्त कराते हैं ।
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SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनः सोऽग्निः कीदृशोऽस्तीत्याह ॥

Anvay:

यो हव्यवाहनो दूतश्चाग्निर्मानुषा युगा सीदत् स हि होता कविक्रतुरिव कार्य्यसाधको भवति ॥२३॥

Word-Meaning: - (सः) (हि) यतः (यः) (मानुषा) मनुष्यसम्बन्धीनि (युगा) युगानि वर्षाणि वर्षसमुदितानि वा (सीदत्) सीदति (होता) दाता (कविक्रतुः) महान् विद्वान् (दूतः) (च) (हव्यवाहनः) यो हव्यानि हुतानि द्रव्याणि वहति ॥२३॥
Connotation: - अत्र वाचकलुप्तोपमालङ्कारः। योऽग्निर्धार्मिकविद्वत्कार्य्यकरो भवति स हि विद्वद्भिः कार्य्यसिद्धये सम्प्रयोक्तव्यः ॥२३॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - May that Agni, cosmic highpriest of nature’s yajna, receiver of oblations and giver of the fruits of corporate action, visionary power of creative holiness, harbinger and disseminator of fragrance like a messenger, creator and distributor of the finest things of life, join us and be seated with us on the vedi for all ages of human history.
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ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The nature of Agni is told further.

Anvay:

Agni (fire) which is the bearer of the oblations and is like a messenger (conveying smoke and fragrance of the oblation to distant places), is seated in every age. Like a great scholar, it is accomplisher of great works.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - Agni (fire) which is accomplisher of many works like a righteous highly learned person, should be used for accomplishing various purposes by the enlightened men.
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MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - या मंत्रात वाचकलुप्तोपमालंकार आहे. जो अग्नी धार्मिकाचे व विद्वानांचे कार्य करतो, त्याला विद्वान लोकांनी कार्याच्या सिद्धीसाठी प्रयुक्त करावे. ॥ २३ ॥