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ते ते॑ देव नेत॒र्ये चे॒माँ अ॑नु॒शसे॑। ते रा॒या ते ह्या॒३॒॑पृचे॒ सचे॑महि सच॒थ्यैः॑ ॥२॥

English Transliteration

te te deva netar ye cemām̐ anuśase | te rāyā te hy āpṛce sacemahi sacathyaiḥ ||

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Pad Path

ते। ते॒। दे॒व॒। ने॒तः॒। ये। च॒। इ॒मान्। अ॒नु॒ऽशसे॑। ते। रा॒या। ते। हि। आ॒ऽपृचे॑। सचे॑महि। स॒च॒थ्यैः॑ ॥२॥

Rigveda » Mandal:5» Sukta:50» Mantra:2 | Ashtak:4» Adhyay:3» Varga:4» Mantra:2 | Mandal:5» Anuvak:4» Mantra:2


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर मनुष्यों को क्या करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे (नेतः) अग्रणी (देव) विद्वन् ! (ये) जो (ते) आपके (अनुशसे) अनुशासन के लिये (इमान्) इनको सम्बन्धित करते हैं (ते, ते) वे वे सत्कार करने योग्य हों (च) और जो (राया) धन से सब की रक्षा करते हैं (ते) वे प्रीति से युक्त होते हैं और जो (हि) निश्चित (आपृचे) सब ओर से सम्बन्ध के लिये (सचथ्यैः) पूर्ण सम्बन्धों में उत्पन्न हुओं के साथ वर्त्तमान हैं, उनके साथ हम लोग (सचेमहि) मिलें ॥२॥
Connotation: - हे विद्वन् ! आप इन वर्त्तमान और समीप में स्थित जनों को शिक्षा दीजिये और विद्वानों के साथ मिल के विद्याओं को प्राप्त हूजिये ॥२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

धन-प्रभु सम्पर्क व उत्तम मित्र

Word-Meaning: - [१] हे (देव) = प्रकाशमय (नेतः) = सारे संसार के संचालक प्रभो ! (ते) = हम तेरे हैं और (ते) = तेरे ही हैं। (च) = और (ये) = जो हम (इमान् अनुशसे) = इन (आधि) = व्याधियों को नष्ट करने के लिये होते हैं [शसति to kill, to destroy] वस्तुतः प्रभु के बनने पर हम प्रभु की शक्ति से शक्ति-सम्पन्न होते हैं और वासनाओं को विनष्ट कर पाते हैं । [२] (ते) = वे हम राया जीवन-यात्रा के लिये आवश्यक धन से (सचेमहि) = संयुक्त हों। (ते) = वे हम (हि) = निश्चय से (आपृचे) = आपके सम्पर्क के लिये हों और (सचथ्यैः) = मेल में उत्तम मित्रों के साथ [सचेमहि:] मेलवाले हैं। हमारा साथ सदा उत्तम मित्रों के साथ हो। इस साथ का ही तो हमारे जीवन पर महान् प्रभाव होता है।
Connotation: - भावार्थ- हम प्रभु के बनकर रोग व वासनाओं को विनष्ट करें। हम धन को प्राप्त करें, प्रभु के साथ सम्पर्कवाले हों, उत्तम मित्रों को प्राप्त करें।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनर्मनुष्यैः किं कर्त्तव्यमित्याह ॥

Anvay:

हे नेतर्देव ! ये तेऽनुशस इमान् सम्बध्नन्ति ते ते सत्कर्त्तव्याः स्युः। ये च राया सर्वान् रक्षन्ति ते प्रीतिमन्तो जायन्ते। ये हृापृचे सचथ्यैर्वर्त्तन्ते तैः सह वयं सचेमहि ॥२॥

Word-Meaning: - (ते) तव (ते) (देव) विद्वान् (नेतः) नायक (ये) (च) (इमान्) (अनुशसे) अनुशासनाय (ते) (राया) धनेन (ते) (हि) (आपृचे) समन्तात् सम्पर्काय (सचेमहि) संयुञ्जमहि (सचथ्यैः) सचथेषु समवायेषु भवैः ॥२॥
Connotation: - हे विद्वँस्त्वमिमान् वर्त्तमानान् समीपस्थान् जनाननुशाधि विद्वद्भिः सह सङ्गत्य विद्याः प्राप्नुहि ॥२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O brilliant leader and ruler, those who have chosen you are wholly for you, and so are these whom you approve and admire. All the assets and powers of the nation are yours to rule and protect, and to share, defend and augment the same we are keen to join you and win your favour.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

What should men do is told further.

Anvay:

O highly learned leader! all those are to be honoured by you who unite these people with you for receiving your instructions. Those who guard honour of all with wealth are loved by all or become popular. Let us be united with them who in order to establish close contact with you deal in accordance with the rules of proper association.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - O learned person! give instructions to the people who are near you and receive higher knowledge of various sciences by the association of great scholars or scientists.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - हे विद्वाना! तू जवळ असलेल्या लोकांना शिक्षण दे व विद्वानांचा संग करून विद्या प्राप्त कर. ॥ २ ॥