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अग्ने॒ विश्वे॑भि॒रा ग॑हि दे॒वेभि॑र्ह॒व्यदा॑तये। होता॑रं त्वा वृणीमहे ॥४॥

English Transliteration

agne viśvebhir ā gahi devebhir havyadātaye | hotāraṁ tvā vṛṇīmahe ||

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Pad Path

अग्ने॑। विश्वे॑भिः। आ। ग॒हि॒। दे॒वे॒भिः॑। ह॒व्यऽदा॑तये। होता॑रम्। त्वा॒। वृ॒णी॒म॒हे॒ ॥४॥

Rigveda » Mandal:5» Sukta:26» Mantra:4 | Ashtak:4» Adhyay:1» Varga:19» Mantra:4 | Mandal:5» Anuvak:2» Mantra:4


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर विद्वद्विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे (अग्ने) विद्वन् ! जिन (होतारम्) देनेवाले (त्वा) आपका हम लोग (वृणीमहे) स्वीकार करते हैं, वह आप (हव्यदातये) देने योग्य दान के लिये (विश्वेभिः) सम्पूर्ण (देवेभिः) विद्वानों के साथ (आ, गहि) प्राप्त हूजिये ॥४॥
Connotation: - मनुष्यों को चाहिये कि विद्वानों का सत्कार कर उन्हें बुलावें और विद्वान् जन भी विद्वानों के साथ प्राप्त होकर निरन्तर सत्य का उपदेश करें ॥४॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

दिव्यगुणों व प्रभु की प्राप्ति के लिए 'हव्यदाति' बनें

Word-Meaning: - १. हे (अग्ने) = परमात्मन्! आप (हव्यदातये) = हव्यों के देनेवाले यज्ञशील पुरुष के लिए (विश्वेभिः देवेभिः) = सब देवों के साथ (आगहि) = प्राप्त होइए। देने के स्वभाववाला यज्ञशील पुरुष दिव्यगुणों को प्राप्त हो और इन दिव्यगुणों का वर्धन करता हुआ अन्ततः आपकी प्राप्ति का पात्र हो । २. हम (होतारम्) = सब-कुछ देनेवाले (त्वा) = आपको ही (वृणीमहे) = वरते हैं। आपकी प्राप्ति में सब प्राप्त हो जाता है। आपके उपासक बनने पर मनुष्य को किसी प्रकार की कमी नहीं रह जाती।
Connotation: - भावार्थ- हम हव्यदाति-यज्ञशील बनें। हमें सब दिव्यगुण प्राप्त होंगे। दिव्यगुणों के साथ हम प्रभु के समीप होते चलेंगे। हम में किसी बात की कमी न रहेगी।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनर्विद्वद्विषयमाह ॥

Anvay:

हे अग्ने ! यं होतारं त्वा वयं वृणीमहे स त्वं हव्यदातये विश्वेभिर्देवेभिः सहा गहि ॥

Word-Meaning: - (अग्ने) विद्वन् (विश्वेभिः) समग्रैः (आ) (गहि) आगच्छ (देवेभिः) विद्वद्भिः (हव्यदातये) दातव्यदानाय (होतारम्) (त्वा) (वृणीमहे) ॥४॥
Connotation: - मनुष्यैर्विदुषां स्वीकारं कृत्वा त आह्वातव्या, विद्वांसश्च विद्वद्भिः सहागत्य सततं सत्यमुपदिशन्तु ॥४॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Agni, light and fire of yajna, spirit of creation and cooperation, come with all the divinities and nobilities of nature and humanity for the presentation of the fruits of yajnic creation. We elect and invite you as the presiding priest and the chief yajaka.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The duties of the enlightened persons are told further in the fourth mantra.

Anvay:

O learned person ! we choose you a donor as the priest of the Yajna. Come with all the enlightened persons for giving what is worth giving (including knowledge, happiness etc.).

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - Men should invite the great scholars respectfully and you should come along with other enlightened men and give true teachings to the people constantly.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - माणसांनी विद्वानांचा सत्कार करून त्यांना आमंत्रित करावे व विद्वानांनीही विद्वानांच्या संगतीत राहून निरंतर सत्याचा उपदेश करावा. ॥ ४ ॥