Go To Mantra
Viewed 354 times

अ॒स्माकं॑ त्वा मती॒नामा स्तोम॑ इन्द्र यच्छतु। अ॒र्वागा व॑र्तया॒ हरी॑ ॥१५॥

English Transliteration

asmākaṁ tvā matīnām ā stoma indra yacchatu | arvāg ā vartayā harī ||

Mantra Audio
Pad Path

अ॒स्माक॑म्। त्वा॒। म॒ती॒नाम्। आ। स्तोमः॑। इ॒न्द्र॒। य॒च्छ॒तु॒। अ॒र्वाक्। आ। व॒र्त॒य॒। हरी॒ इति॑ ॥१५॥

Rigveda » Mandal:4» Sukta:32» Mantra:15 | Ashtak:3» Adhyay:6» Varga:29» Mantra:5 | Mandal:4» Anuvak:3» Mantra:15


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे (इन्द्र) राजन् ! (अस्माकम्) हम (मतीनाम्) विचारशील मनुष्यों की (स्तोमः) स्तुति जिन (त्वा) आपको (आ, यच्छतु) प्राप्त होवे वह आप (अर्वाक्) फिर (हरी) अग्नि जल वा घोड़ों को (आ, वर्त्तय) अच्छे प्रकार वर्त्ताइये ॥१५॥
Connotation: - जिस विद्या और विनय से युक्त राजा को सब प्रकार प्रशंसा प्राप्त होवे, वही प्रजा को नियमयुक्त कर सके ॥१५॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

स्तवन व इन्द्रियों का प्रत्याहरण

Word-Meaning: - [१] हे (इन्द्र) = सब शत्रुओं का विद्रावण करनेवाले प्रभो ! (मतीनाम्) = मननपूर्वक स्तवन करनेवाले (अस्माकम्) = हमारा (स्तोमः) = स्तुतिसमूह (त्वा आयच्छतु) = आपको हमारे में स्थापित करनेवाला हो, अर्थात् आपकी स्तुति द्वारा हम अपने हृदयों को आपका अधिष्ठान बना सकें। [२] आप (हरी) = ज्ञानेन्द्रिय व कर्मेन्द्रिय रूप अश्वों को (अर्वाग् आवर्तय) = अन्तर्मुख वृत्तिवाला करिए। आपके स्तवन से हमारी इन्द्रियाँ बहिर्मुखी वृत्तिवाली न रहें। विषयव्यावृत्त होकर ये प्रत्याहत हों अन्दर ही स्थापित हों ।
Connotation: - भावार्थ- मनन पूर्वक प्रभु का स्तवन हमारे हृदयों को प्रभु का अधिष्ठान बनाए । हमारी इन्द्रियाँ विषयव्यावृत्त होकर अन्तर्मुख यात्रावाली हों ।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तमेव विषयमाह ॥

Anvay:

हे इन्द्र ! अस्माकं मतीनां स्तोमो यं त्वा आ यच्छतु स त्वमर्वाग्धरी आवर्त्तय ॥१५॥

Word-Meaning: - (अस्माकम्) (त्वा) त्वाम् (मतीनाम्) मननशीलानां मनुष्याणाम् (आ) (स्तोमः) स्तुतिः (इन्द्र) (यच्छतु) निगृह्णातु (अर्वाक्) पुनः (आ) (वर्त्तय) अत्र संहितायामिति दीर्घः । (हरी) अग्निजले अश्वौ वा ॥१५॥
Connotation: - यं विद्याविनययुक्तं राजानं सर्वतः प्रशंसा प्राप्नुयात् स एव प्रजा नियन्तुं शक्नुयात् ॥१५॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, may the song of praise and prayer composed by our wise poets rise and reach you, and then, we pray, turn the horses of your chariot hitherward to us.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The attributes of teachers and preachers are further dealt.

Anvay:

O king! the cheerings or applauses which we thoughtful persons offer to you may enable you to treat energy and water or train the horse-power well again and again.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - A king who is well skilled and humble, earns appreciation and admiration of every kind. Only such a ruler can discipline his subjects.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - ज्या विद्या विनययुक्त राजाची सर्व प्रकारे प्रशंसा होते तोच प्रजेचे नियमन करू शकतो. ॥ १५ ॥