Go To Mantra
Viewed 339 times

तुभ्येदि॑न्द्र॒ स्व ओ॒क्ये॒३॒॑ सोमं॑ चोदामि पी॒तये॑। ए॒ष रा॑रन्तु ते हृ॒दि॥

English Transliteration

tubhyed indra sva okye somaṁ codāmi pītaye | eṣa rārantu te hṛdi ||

Mantra Audio
Pad Path

तुभ्य॑। इत्। इ॒न्द्र॒। स्वे। ओ॒क्ये॑। सोम॑म्। चो॒दा॒मि॒। पी॒तये॑। ए॒षः। र॒र॒न्तु॒। ते॒। हृ॒दि॥

Rigveda » Mandal:3» Sukta:42» Mantra:8 | Ashtak:3» Adhyay:3» Varga:6» Mantra:3 | Mandal:3» Anuvak:4» Mantra:8


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं।

Word-Meaning: - हे (इन्द्र) ऐश्वर्य्ययुक्त जन ! जो (एषः) यह (ते) आपके (हृदि) हृदय में (रारन्तु) अत्यन्त रमैं उस (सोमम्) रस को (स्वे) अपने (ओक्ये) गृह में (पीतये) पीने को (तुभ्य) आपके लिये (इत्) ही (चोदामि) प्रेरणा करता हूँ ॥८॥
Connotation: - प्राणी लोग जो खाते और पीते हैं, वह सब पदार्थ रुधिर आदि हो और हृदय में फैलकर मस्तक के द्वारा सर्वत्र फैलता है ॥८॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सोमजनित हृदयोल्लास

Word-Meaning: - [१] हे (इन्द्र) = जितेन्द्रिय पुरुष ! (तुभ्य इत्) = निश्चय से तेरे लिए ही (स्वे ओक्ये) = इस आत्मा के निवास स्थानभूत शरीर में [ओक्य गृह] (सोमम्) = सोम को वीर्य को (पीतये) = अन्दर ही व्याप्त करने के लिए (चोदामि) = प्रेरित करता हूँ। इसके शरीर में व्याप्त होने से नीरोगता आदि द्वारा मनुष्य आनन्द का अनुभव करता है। [२] (एषः) = ये (ते) = तेरे (हृदि) = हृदय में (रारन्तु) = रमण करनेवाला हो । सुरक्षित हुआ-हुआ सोम हृदय में आन को उत्पन्न करता है ।
Connotation: - भावार्थ - शरीर में सुरक्षित सोम हमारी उन्नति का कारण होता है और यह हृदय में आनन्द उत्पन्न करता है ।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तमेव विषयमाह।

Anvay:

हे इन्द्र ! य एष ते हृदि रारन्तु तं सोमं स्व ओक्ये पीतये तुभ्येच्चोदामि ॥८॥

Word-Meaning: - (तुभ्य) तुभ्यम्। अत्र सुपां सुलुगिति विभक्तेर्लुक्। (इत्) एव (इन्द्र) ऐश्वर्य्ययुक्त (स्वे) स्वकीये (ओक्ये) गृहे (सोमम्) रसम् (चोदामि) प्रेरयामि (पीतये) (एषः) (रारन्तु) भृशं रमताम् (ते) तव (हृदि) हृदये ॥८॥
Connotation: - प्राणिभिर्यद्भुज्यते पीयते च तत्सर्वं रुधिरादिकं भूत्वा हृदि संसृत्य मस्तकद्वारा सर्वत्र प्रसरति ॥८॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, lord lover of power and energy, for your drink I distil and reinforce this soma in my own yajnic house of science. It would inspire, strengthen and delight your heart.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

Honoring of the learned is stressed.

Anvay:

O Indra (wealthy king) ! I offer you this Soma (juice of various nourishing drugs) for your drinking at your abode. May it delight your heart ?

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - Whatever is eaten or drunk by all beings, that is turned into blood etc., which ultimately circulates in the heart, brain, and spreads everywhere.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - प्राणी जे खातात-पितात ते सर्व पदार्थ रक्त इत्यादी बनून हृदयात पसरून मस्तकाद्वारे सर्वत्र पसरतात. ॥ ८ ॥