Go To Mantra
Viewed 439 times

आ रोद॑सी अपृण॒दा स्व॑र्म॒हज्जा॒तं यदे॑नम॒पसो॒ अधा॑रयन्। सो अ॑ध्व॒राय॒ परि॑ णीयते क॒विरत्यो॒ न वाज॑सातये॒ चनो॑हितः॥

English Transliteration

ā rodasī apṛṇad ā svar mahaj jātaṁ yad enam apaso adhārayan | so adhvarāya pari ṇīyate kavir atyo na vājasātaye canohitaḥ ||

Mantra Audio
Pad Path

आ। रोद॑सी॒ इति॑। अ॒पृ॒ण॒त्। आ। स्वः॑। म॒हत्। जा॒तम्। यत्। ए॒न॒म्। अ॒पसः॑। अधा॑रयन्। सः। अ॒ध्व॒राय॑। परि॑। नी॒य॒ते॒। क॒विः। अत्यः॑। न। वाज॑ऽसातये। चनः॑ऽहितः॥

Rigveda » Mandal:3» Sukta:2» Mantra:7 | Ashtak:2» Adhyay:8» Varga:18» Mantra:2 | Mandal:3» Anuvak:1» Mantra:7


SWAMI DAYANAND SARSWATI

अब अग्नि विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

Word-Meaning: - हे विद्वानों ! आप जैसे (चनोहितः) अन्न के लिये हित करानेवाला (वाजसातये) अन्नादि पदार्थों के विभाग करने को (अस्यः) जैसे व्याप्तिशील अर्थात् चालों में व्याप्ति रखनेवाला अश्व (न) वैसे (कविः) चञ्चल देखा जाए ऐसा अग्नि (रोदसी) आकाश और पृथिवी (आ, अपृणत्) अच्छेप्रकार पूर्ण करता है वा (यत्) जिस (महत्) बहुत (जातम्) उत्पन्न हुए (स्वः) सुख को (आ) अच्छे प्रकार परिपूर्ण करता है (सः) वह (अध्वराय) अहिंसारूप यज्ञ के लिये (परिणीयते) प्राप्त किया जाता है वैसे (एनम्) उक्त अग्नि को (अपसः) कर्म से (अधारयन्) धारण करें ॥७॥
Connotation: - इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जो विद्युत् रूप अग्नि सूर्य पृथिवी उनमें स्थित और अन्तरिक्षस्थ पदार्थों को प्रकाशित करता है, यदि वह यानों में प्रयुक्त किया जाय तो सबका हितकारी हो ॥७॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

लोकत्रयी का पूरण

Word-Meaning: - [१] (यत्) = जब, गतमन्त्र के अनुसार, (जातम्) सदा से प्रादुर्भूत (एनम्) = इस प्रभु को (अपसः) = कर्मशील लोग (अधारयन्) = अपने हृदयों में धारण करते हैं तो यह प्रभु (रोदसी) = द्यावापृथिवी को (आ अपृणत्) = समन्तात् पूरित करता है, अर्थात् इन उपासकों के मस्तिष्क व शरीर को न्यूनताओं से रहित करता है। इनके शरीर को दृढ़ व नीरोग बनाता है और इनके मस्तिष्क को ज्ञानोज्ज्वल करता है। इसी प्रकार वे प्रभु (महत् स्वः) = इस महान् अन्तरिक्ष को भी पूरित करते हैं, हृदयान्तरिक्ष में भी किसी प्रकार की न्यूनता को नहीं आने देते। उपासक का हृदय महान् व पवित्र बनता है। [२] (सः) = वह प्रभु (अध्वराय) = यज्ञों के लिये (परिणीयते) = सर्वतः प्राप्त किया जाता है। उस प्रभु द्वारा ही तो हमारे यज्ञ पूर्ण होते हैं। (कविः) = वे प्रभु सर्वज्ञ हैं, (अत्यः न अश्व) = के समान हैं-सतत क्रियाशील हैं। प्रभु ज्ञान व क्रिया (शक्ति) की पराकाष्ठा हैं। वे प्रभु (वाजसातये) = शक्ति-प्राप्ति के लिये होते हैं, प्रभु से हमें शक्ति प्राप्त होती है। इस शक्ति को प्राप्त कराने के लिए ही (चनोहितः) = वे अन्न का धारण करनेवाले हैं। अन्नों द्वारा वे हमारे शरीरों में प्राणशक्ति को स्थापित करते हैं अन्नं वै प्राणिनां प्राणा: ।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु का हम उपासन करेंगे तो प्रभु हमारे शरीर, हृदय व मस्तिष्क सभी को बड़ा सुन्दर बनाएँगे। हमारा जीवन यज्ञमय होगा और अन्नों का सेवन करते हुए हम शक्तिशाली बनेंगे।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

अथाग्निविषयमाह।

Anvay:

हे विद्वांसो भवन्तो यथायं चनोहितो वाजसातयेऽत्यो न कविरग्नी रोदसी आपृणद्यन्महज्जातं स्वरापृणत्सोऽध्वराय परिणीयते तथैनमपसोऽधारयन् ॥७॥

Word-Meaning: - (आ) (रोदसी) द्यावापृथिव्यौ (अपृणत्) पूरयति (आ) (स्वः) सुखम् (महत्) (जातम्) (यत्) (एनम्) (अपसः) कर्मणः (अधारयन्) धारयन्तु (सः) (अध्वराय) अहिंसारूपयज्ञाय (परि) सर्वतः (नीयते) प्राप्यते (कविः) क्रान्तदर्शनः (अत्यः) व्याप्तिशीलोऽश्वः (न) इव (वाजसातये) अन्नादीनां संविभागाय (चनोहितः) अन्नाय हितकारी ॥७॥
Connotation: - अत्र वाचकलुप्तोपमालङ्कारः। यो विद्युद्रूपोऽग्निः सूर्यं पृथिवीन्तत्स्थानन्तरिक्षस्थांश्च प्रकाशयति यदि स यानेषु प्रयुज्येत तर्हि सर्वेषां हितकारी स्यात् ॥७॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - When people of yajnic karma take to this Agni for service, light up the fire, raise it and feed the rising power, then it fills the earth and skies and the vast and high heavens with light and fragrance of bliss. And thus this power and presence of Agni, lord of power and bliss, poetic omniscient, treasure home of food, energy and light, is extended far and wide across the universe for the speed and success of yajna, human acts of love, non-violence and creative self-sacrifice.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The attributes of Agni (electricity) etc. are told.

Anvay:

O learned persons ! this Agni (in the form of electricity) has filled both heaven and earth and the spacious firmament, giving great delight when properly used. It is useful for food and its proper distribution is invisible and pervasive. It is used for Yajna for benevolent acts like a horse. Let scientists uphold and utilize this Agni for various purposes.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - Agni (electricity) illuminates the sun, earth and other objects on earth and firmament. If it is properly and methodically used in various vehicles, it is beneficial to all.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - या मंत्रात वाचकलुप्तोपमालंकार आहे. जो विद्युतरूपी अग्नी, सूर्य, पृथ्वी व अंतरिक्षातील पदार्थांना प्रकाशित करतो तो जर यानात प्रयुक्त केला तर सर्वांचे हित होईल. ॥ ७ ॥