Go To Mantra
Viewed 444 times

अ॒भि प्रयां॑सि॒ वाह॑सा दा॒श्वाँ अ॑श्नोति॒ मर्त्यः॑। क्षयं॑ पाव॒कशो॑चिषः॥

English Transliteration

abhi prayāṁsi vāhasā dāśvām̐ aśnoti martyaḥ | kṣayam pāvakaśociṣaḥ ||

Mantra Audio
Pad Path

अ॒भि। प्रयां॑सि। वाह॑सा। दा॒श्वान्। अ॒श्नो॒ति॒। मर्त्यः॑। क्षय॑म्। पा॒व॒कऽशो॑चिषः॥

Rigveda » Mandal:3» Sukta:11» Mantra:7 | Ashtak:3» Adhyay:1» Varga:10» Mantra:2 | Mandal:3» Anuvak:1» Mantra:7


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

Word-Meaning: - जो (दाश्वान्) देनेवाला (मर्त्यः) मनुष्य (पावकशोचिषः) अग्नि की दीप्ति के सदृश दीप्तियुक्त विद्वान् पुरुष के (क्षयम्) विद्यास्थान को (अश्नोति) प्राप्त होता वह (वाहसा) उत्तम पदवी को प्राप्त होने से (प्रयांसि) कामना अभिलाषा के योग्य अन्न आदि को (अभि) प्राप्त होता है ॥७॥
Connotation: - जब मनुष्य विद्वानों की विद्यापदवी को प्राप्त होते हैं, तब ही उनके मनोरथ पूर्ण होते हैं ॥७॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

युक्ताहार-विहार व प्रभुप्राप्ति

Word-Meaning: - [१] (दाश्वान् मर्त्यः) = प्रभु के प्रति अपना अर्पण करनेवाला व्यक्ति (वाहसा) = शरीरवहन के दृष्टिकोण से (प्रयांसि) = अन्नों को (अभि अश्नोति) = सर्वतः प्राप्त करता है। यह शरीर धारण के लिए ही भोजन करता है और शरीर धारण के लिए आवश्यक भोजन इसे प्राप्त हो ही जाता है। [२] शरीरधारण के लिए ही भोजन करता हुआ यह व्यक्ति (पावकशोचिषः) = उस पवित्र दीप्तिवाले प्रभु के (क्षयम्) = गृह को (अभि अश्नोति) = प्राप्त करता है। भोजनादि में बड़ी 'युक्तता' वाला होता हुआ यह इस लोक को भी स्वास्थ्य द्वारा सुन्दर बनाता है और परलोक में तो प्रभुप्राप्ति का अधिकारी बनता है।
Connotation: - भावार्थ- हम प्रभु के प्रति अपना अर्पण करें। नपा- तुला भोजन करते हुए हम पवित्र ज्ञानदीप्तिवाले प्रभु को प्राप्त करें ।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तमेव विषयमाह।

Anvay:

यो दाश्वान्मर्त्यो पावकशोचिषः क्षयमश्नोति स वाहसा प्रयांस्यभ्यश्नोति ॥७॥

Word-Meaning: - (अभि) आभिमुख्ये (प्रयांसि) कमनीयान्यन्नादीनि (वाहसा) प्रापणेन (दाश्वान्) दाता (अश्नोति) प्राप्नोति (मर्त्यः) मनुष्यः (क्षयम्) निवासम् (पावकशोचिषः) पावकस्याग्नेः शोचिर्दीप्तिरिव शोचिर्यस्य विदुषस्तस्य ॥७॥
Connotation: - यदा मनुष्या विदुषां विद्यास्थानं प्राप्नुवन्ति तदैव पूर्णकामा जायन्ते ॥७॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - By virtue of the leading light of Agni, the generous man who gives in yajnic action gets his objects of desire, and from the rising flames of holy fire as by virtue of the scholar’s brilliance of knowledge, he gets a haven of peace.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The learned persons' duties are enumerated.

Anvay:

When a donor or a man entirely devoted to all, reaches the abode of a person of fire-like purifying radiance, he gets all desirable edibles, as conveyed to him by the preceptor.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - All the noble desires of learned men are fulfilled, when they reach at the residence of the enlightened benefactors.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - जेव्हा माणसांना विद्वानांची विद्या प्राप्त होते तेव्हाच त्यांचे मनोरथ पूर्ण होतात. ॥ ७ ॥