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रैभ्या॑सीदनु॒देयी॑ नाराशं॒सी न्योच॑नी । सू॒र्याया॑ भ॒द्रमिद्वासो॒ गाथ॑यैति॒ परि॑ष्कृतम् ॥

English Transliteration

raibhy āsīd anudeyī nārāśaṁsī nyocanī | sūryāyā bhadram id vāso gāthayaiti pariṣkṛtam ||

Pad Path

रैभी॑ । आ॒सी॒त् । अ॒नु॒ऽदेयी॑ । ना॒रा॒शं॒सी । नि॒ऽओच॑नी । सू॒र्यायाः॑ । भ॒द्रम् । इत् । वासः॑ । गाथ॑या । ए॒ति॒ । परि॑ऽकृतम् ॥ १०.८५.६

Rigveda » Mandal:10» Sukta:85» Mantra:6 | Ashtak:8» Adhyay:3» Varga:21» Mantra:1 | Mandal:10» Anuvak:7» Mantra:6


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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (सूर्यायाः) सूर्य की दीप्ति-उषा के समान कान्तिवाली नववधू की (रेभी-अनुदेयी-आसीत्) उपदेश करनेवाले पुरोहित की शिक्षा दी जानी चाहिए विवाह के पश्चात् (नाराशंसी न्योचनी) मनुष्यसम्बन्धी संवेदना भी देने योग्य है। (भद्रम्-इत्-वासः) कल्याणसाधक वस्त्र या स्थान ही (परिष्कृतम्) सुशोभित (गाथया-एति) आशीर्वादरूप वाणी से प्राप्त करती है ॥६॥
Connotation: - सुशोभित हुई नववधू को पुरोहित के द्वारा शिक्षा दी जानी चहिये तथा वृद्ध महानुभावों के द्वारा आश्वासन और आशीर्वाद भी देने योग्य है, सुन्दर वस्त्र देने चाहिएँ ॥६॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सूर्या का चरित्र

Word-Meaning: - [१] अब प्रथम पाँच मन्त्रों में सोम के महत्त्व के प्रतिपादन के बाद इस सोम के रक्षण करनेवाले पुरुष के साथ सूर्या के विवाह का उल्लेख ६ से १६ मन्त्रों तक किया गया है इस विवाह के समय (रैभी) = जिसके द्वारा प्रभु का स्तवन होता है वह ऋचा 'रैभी' कहलाती है यह रैभी ऋचा ही (अनुदेयी आसीत्) = दहेज थी, अर्थात् पिता कन्या को ऋचाओं के द्वारा प्रभुस्तवन की वृत्तिवाली बना देता है। यह स्तुति वृत्तिवाली बना देना ही सर्वोत्तम दहेज देना है। [२] (नाराशंसी) = नर समूह के शंसन की वृत्ति सबकी अच्छाइयों का ही कथन करने और कमियों को न कहने की वृत्ति ही इसकी (न्योचनी) = इसको ठीक आनेवाली इसकी कमीज होती है । स्तवन, न किं विन्दन, की वृत्ति ही उसके उचित वस्त्र हैं। अथवा (नाराशंसी) = वीर पुरुषों के चरित्रों का शंसन इनके इतिवृत्त का ज्ञान ही इसका समुचितवसन है। [३] (भद्रम्) = इसकी भद्रता [ शराफत ] (इत्)- = ही (वासः) = ओढ़ने का कपड़ा है जो (गाथया परिष्कृतम्) = गाथा से परिष्कृत हुआ हुआ एति इसे प्राप्त होता है। जैसे वस्त्रा किनारी आदि से सुभूषित होता है उसी प्रकार इसकी भद्रता का यह वस्त्र प्रभु गुणगान से सुभूषित है। संक्षेप में यह कन्या भद्र व्यवहारवाली है और प्रभु के गुणों के गायन की वृत्तिवाली है ।
Connotation: - भावार्थ - कन्या को स्तुति वृत्तिवाला बना देना ही सच्चा दहेज है। स्तवन, न कि निन्दन ही इसकी कमीज है। भद्रता ही वस्त्र है जो प्रभु गुणगायन से परिष्कृत है।
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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (सूर्यायाः) सूर्यस्य दीप्त्याः-उषसः इव कान्तिमत्याः खलु नववध्वः (रेभी-अनुदेयी-आसीत्) उपदेशकस्य पुरोहितस्य शिक्षा विवाहानन्तरं दातव्यास्ति (नाराशंसी न्योचनी) नराणां सम्बन्धिजनानां संवेदनापि दातव्या (भद्रम्-इत्-वासः) कल्याणसाधकमेव वस्त्रं स्थानं वा (परिष्कृतम्) सुशोभितं (गाथया-एति) वाचा-आशीर्वाचा प्राप्नोति ॥६॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Raibhi verses of the Veda are the bride’s wedding gifts, Narashansi verses, the bride’s ornaments, grace and good fortune, her bridal robes sanctified by exemplary verses relating to the good life.