Word-Meaning: - [१] [क] (आशसनम्) = घर में चारों ओर शासन, अर्थात् घर के सब व्यक्तियों से कार्यों को ठीक ढंग से कराना, [ख] (विशसनम्) = विशिष्ट इच्छाओंवाला होना, अर्थात् घर में उत्कृष्ट इच्छाओं से घर को उन्नत करने का ध्यान करना (अथो) = और [ग] (अधिविकर्तनम्) = कपड़ों को विविधरूपों में काटने आदि का काम करना, (सूर्यायाः) = सूर्या के (रूपाणि) = इन रूपों को (पश्य) = देखिये । अर्थात् गतमन्त्र के अनुसार जैसे सूर्या भोजन की व्यवस्था को अपने अधीन रखती है, उसी प्रकार प्रस्तुत मन्त्र के अनुसार सूर्या घर का समुचित शासन करती है, उत्कृष्ट इच्छाओंवाली होती हुई घर को उन्नत करती है तथा कपड़ों के सीने आदि के काम को भी स्वयं करती है । [२] (ब्रह्मा) = घर के निर्माण करनेवाला समझदार पति तु तो तानि सूर्या के उन कार्यों को (शुन्धति) = शुद्ध करने का प्रयत्न करता है। अर्थात् उनमें जो थोड़ी बहुत कमी हो उसे उचित परामर्श देकर ठीक करने के लिये यत्नशील होता है ।
Connotation: - भावार्थ - गृहपत्नी [क] घर का शासन करती है, [ख] नये-नये initiatives को लेकर घर को उन्नत करती है, [ग] वस्त्रों के काटने सीने आदि के काम को स्वयं करती है।