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मा वि॑दन्परिप॒न्थिनो॒ य आ॒सीद॑न्ति॒ दम्प॑ती । सु॒गेभि॑र्दु॒र्गमती॑ता॒मप॑ द्रा॒न्त्वरा॑तयः ॥

English Transliteration

mā vidan paripanthino ya āsīdanti dampatī | sugebhir durgam atītām apa drāntv arātayaḥ ||

Pad Path

मा । वि॒द॒न् । प॒रि॒ऽप॒न्थिनः॑ । ये । आ॒सीत् । अ॒न्ति॒ । दम्प॑ती॒ इति॒ दम्ऽप॑ती । सु॒ऽगेभिः॑ । दुः॒ऽगम् । अति॑ । इ॒ता॒म् । अप॑ । द्रा॒न्तु॒ । अरा॑तयः ॥ १०.८५.३२

Rigveda » Mandal:10» Sukta:85» Mantra:32 | Ashtak:8» Adhyay:3» Varga:26» Mantra:2 | Mandal:10» Anuvak:7» Mantra:32


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (दम्पती) वधू और वर को, पतिपत्नी को (ये) जो रोग (आसीदन्ति) आक्रमण करते हैं (परिपन्थिनः) चोरों के समान गुप्तरूप में हुए (मा विदन्) न प्राप्त हों (सुगेभिः) सुखप्रद आचरणों के द्वारा (दुर्गम्-अतीताम्) उनका दुःखप्रद कारण दूर हो जाए (अरातयः) न देनेवाले किन्तु रस रक्तादि के लेने-शोषण करनेवाले रोग (अप द्रान्तु) दूर हो जाएँ ॥३२॥
Connotation: - गृहस्थ में पति-पत्नी को गुप्तरोग घेर लेते हैं, उनके मूलकारण को जान करके सदाचरणों से दूर करना चाहिए, अन्यथा वे शरीर के रस-रक्तादि धातुओं को नष्ट कर डालेंगे ॥३२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

चोर आदि के भय का न होना

Word-Meaning: - [१] (ये) = जो (परिपन्थिनः) = चोर आदि विरोधी व्यक्ति (दम्पती) = इन पति-पत्नी को (आसीदन्ति) = समीपता से प्राप्त होते हैं वे (मा विदन्) = मत प्राप्त हों। मार्ग में या घर पर चोर आदि का भय न हो। [२] (सुगेभिः) = सुखकर गमनों से (दुर्गम्) = कठिनता से गन्तव्य प्रदेशों को (अतीताम्) = लाँघ जाएँ और (अरातयः) = शत्रु (अपद्रान्तु) = दूर ही रहें, दूर भाग जाएँ।
Connotation: - भावार्थ-मार्ग में या घर पर इन पति-पत्नी को शत्रुओं का भय न हो ।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (दम्पती ये-आसीदन्ति) भार्यापती वधूवरौ प्रति ये-आक्रामन्ति (परिपन्थिनः) पर्यवस्थातारश्चौरा इव रोगाः (मा विदन्) न प्राप्नुयुः (सुगेभिः-दुर्गम्-अतीताम्) सुखप्रदैराचरणैर्दुःखप्रदं कारणं परिगच्छतां (अरातयः-अपद्रान्तु) न दातारोऽपि तु रसरक्तादीनां ग्रहीतारः शोषयितारस्ते रोगा दूरं गच्छन्तु ॥३२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - And those which overtake and afflict the wedded couple on their course of life must not come, and may all adversities, wants and malignities disappear and go down to far off depths beyond recurrence.