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द्वे ते॑ च॒क्रे सू॑र्ये ब्र॒ह्माण॑ ऋतु॒था वि॑दुः । अथैकं॑ च॒क्रं यद्गुहा॒ तद॑द्धा॒तय॒ इद्वि॑दुः ॥

English Transliteration

dve te cakre sūrye brahmāṇa ṛtuthā viduḥ | athaikaṁ cakraṁ yad guhā tad addhātaya id viduḥ ||

Pad Path

द्वे इति॑ । ते॒ । च॒क्रे इति॑ । सू॒र्ये॒ । ब्र॒ह्माणः॑ । ऋ॒तु॒ऽथा । वि॒दुः॒ । अथ॑ । एक॑म् । च॒क्रम् । यत् । गुहा॑ । तत् । अ॒द्धा॒तयः॑ । इत् । वि॒दुः॒ ॥ १०.८५.१६

Rigveda » Mandal:10» Sukta:85» Mantra:16 | Ashtak:8» Adhyay:3» Varga:23» Mantra:1 | Mandal:10» Anuvak:7» Mantra:16


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (सूर्ये) हे तेजस्वी वधू ! (ते द्वे-चक्रे) तेरे दो चक्ररूप श्रोत्रों को (ब्रह्माणः) विद्वान् (ऋतुथा) समय-समय पर यथावसर (विदुः) गृहस्थजीवन में श्रवण करने के लिये हैं। ये आमन्त्रित किये हुए विद्वान् जानते हैं कि तू श्रवणप्रिया है (अथ) और (एकं चक्रम्) एक चक्र, जो हृदय में मनोरूप है (तत्) उसको तो (अद्धातयः-इत्-विदुः) साक्षाद् ध्यानी मेधावी ही जानते हैं कि तू भोगमात्र में लिप्त नहीं है, परमात्मा का भी ध्यान करती है ॥१६॥
Connotation: - गृहस्थ के अन्दर आते ही वधू को भोग में लिप्त नहीं होना चहिए, किन्तु समय-समय पर विद्वानों से उपदेश सुनते रहना चाहिए और हार्दिक भावना से परमात्मा का चिन्तन ध्यान भी करना चाहिए ॥१६॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

प्रथम चक्र व पिछले दो चक्र

Word-Meaning: - [१] हे सूर्ये! (ते) = तेरे विषय में द्वेचक्रे लगनेवाले दो चक्रों [चक्करों] को तो (ब्रह्माण:) = सर्वज्ञानी पुरुष (ऋतुथा) = उस-उस समय के अनुसार (विदः) = जानते ही हैं। दहेज [बहुत] के लेने के लिये आनेवाला चक्र और विवाह के लिये आनेवाला चक्र तो सबको पता लगता ही है । [२] (अथ) = परन्तु (एकं चक्रम्) = पहला चक्र, जब कि वरपक्षवाले पूछताछ के लिये अपने किसी मित्र के यहाँ आकर ठहरे, (यद् गुहा) = जो चक्र संवृत-सा है [गुह संवरणे] (तद्) = उस चक्र को तो (अद्धातयः) = उस चक्र के ज्ञाता (इत्) = ही, अर्थात् उस चक्र में हिस्सा लेनेवाले ही (विदुः) = जानते हैं। उस समय वर के माता-पिता व उनके वे मित्र, जिनके कि यहाँ आकर प्रथम चक्र में वे ठहरे, वे ही इस चक्र के विषय में जानते हैं ।
Connotation: - भावार्थ - विवाह प्रसंग में सर्वप्रथम जानकारी के लिये लगाया गया चक्र गुप्त ही होता है । दहेज व विवाह के लिये लगनेवाले चक्र तो सब कोई जानते ही हैं।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (सूर्ये) हे तेजस्विनि वधू ! (ते द्वे चक्रे) तव द्वे चक्रे श्रोत्ररूपे (ब्रह्माणः-ऋतुथा विदुः) विद्वांसः समये समये यथावसरं गार्हस्थजीवने श्रवणार्थमामन्त्रिताः-जानन्ति यत्त्वं श्रवणप्रियाऽसि (अथ-एकं चक्रं यत्-गुहा) पुनश्च यदेकं चक्रं मनोरूपं हृदयगुहायामस्ति (तत्) तत्तु (अद्धातयः-इत्-विदुः) साक्षाद्ध्यानिनो मेधाविन एव जानन्ति “अद्धातयो मेधाविनः” [निघ० ३।।५] यत्त्वं भोगमात्रे लिप्ता तु न ? तेन मनोरूपेण चक्रेण परमात्मानमपि घ्यायसि किम् ॥१६॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O Surya, bride of the new home, the sages of knowledge know the two wheels of your life’s chariot according to the seasons, i.e., your words and actions according to your moods and circumstances. The third, thought, reflection and intentions, is hidden in the depths of the mind which only exceptional master minds know. And that one is a mystery.