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यद्दे॑वा॒ यत॑यो यथा॒ भुव॑ना॒न्यपि॑न्वत । अत्रा॑ समु॒द्र आ गू॒ळ्हमा सूर्य॑मजभर्तन ॥

English Transliteration

yad devā yatayo yathā bhuvanāny apinvata | atrā samudra ā gūḻham ā sūryam ajabhartana ||

Pad Path

यत् । दे॒वाः॒ । यत॑यः । य॒था॒ । भुव॑नानि । अपि॑न्वत । अत्र॑ । स॒मु॒द्रे । आ । गू॒ळ्हम् । आ । सूर्य॑म् । अ॒ज॒भ॒र्त॒न॒ ॥ १०.७२.७

Rigveda » Mandal:10» Sukta:72» Mantra:7 | Ashtak:8» Adhyay:3» Varga:2» Mantra:2 | Mandal:10» Anuvak:6» Mantra:7


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (यत्-यथा यतयः-देवाः) जबकि जैसे परस्पर संगत होते हुए मेघ (भुवनानि-अपिन्वत) जलवर्षा के द्वारा लोकों को सींचते हैं, वैसे (अत्र समुद्रे) इस अन्तरिक्ष में (सूर्यम्-आगूळ्हम्) सृष्टि के आरम्भ में अन्धकार से आच्छादित सूर्य को सूर्य की किरणें पृथक् कर प्रकट करती हैं ॥७॥
Connotation: - मेघ परस्पर मिलकर वर्षा से लोकों को सींचते हैं, सूर्य की किरणें सूर्य को प्रकाशित करती हैं ॥७॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

आकाश में सूर्य का स्थापन

Word-Meaning: - [१] (यद्) = जब (देवाः) = सब देव प्रकृति से उत्पन्न हुए हुए लोक - लोकान्तर (भुवनानि) = इस मर्त्यलोकस्थ प्राणियों को उसी प्रकार (अपिन्वत) = प्रीणित करते हैं (यथा) = जैसे कि (यतयः) = मेघ [जलं नियमयन्ति इति यतयः सा० ], उस समय (अत्रा समुद्रे) = इस अन्तरिक्ष में (सूर्यम्) = सूर्य को (आ-अजभर्तन) = धारण करते हैं, उस सूर्य को जो (गूढम्) = प्रकृति में संवृत रूप में विद्यमान था।[२] मेघ अपने वृष्टिजल से उन सब प्राणियों को शान्ति प्राप्त कराते हैं जो गर्मी के सन्ताप से व्याकुल हो रहे थे। तथा ये मेघ ही वृष्टि द्वारा पृथिवी में अन्नों को उत्पन्न करके प्राणियों की शान्ति का कारण बनते हैं। इसी प्रकार इस ब्रह्माण्ड के सभी लोक-लोकान्तर इन प्राणियों को अपनी विविध देनों के द्वारा प्रीणित करनेवाले होते हैं। इन देवों में सब से महत्त्वपूर्ण स्थान इस सूर्य का है जो प्रजाओं के प्राण के ही रूप में उदित होता है । यह सूर्य भी अन्य लोकों की तरह प्रकृति में छिपा हुआ था। इसे प्रकट करके आकाश में स्थापित किया गया, जिससे यह प्रकाश के द्वारा अन्धकार को दूर करता हुआ सब प्राणियों के अन्दर प्राणशक्ति का संचार करनेवाला हो ।
Connotation: - भावार्थ - प्रकृति से बने सभी प्रकाशमान पिण्ड प्राणियों को अपनी-अपनी देन से प्रीणित करते हैं, सूर्य का आकाश में धारण प्राणियों में प्राणशक्ति के संचार के लिये ही तो हुआ है ।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (यत्-यथा यतयः-देवाः) यतो यथा परस्परं सङ्गच्छमाना मेघाः “यतते गतिकर्मा” [निघ० २।१४] (भुवनानि-अपिन्वत) लोकान् जलवर्षणेन सिञ्चन्ति तथा (अत्र समुद्रे) अस्मिन्-अन्तरिक्षे “समुद्रः-अन्तरिक्षनाम” [निघ० १।३] (सूर्यम् आगूळ्हम्) समन्तात् सृष्टेरारम्भे तमसा गूढं सूर्यं (अजभर्तन) प्रकटयन्ति ॥७॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O Devas, working joyously together as you energise and enliven the regions of the world, so here too in the ocean of matter, energy and prana, you hold, support and cherish the bright sun, the soul deep under the mysterious fivefold cover of existential body form.