Go To Mantra
Viewed 555 times

येभ्यो॑ मा॒ता मधु॑म॒त्पिन्व॑ते॒ पय॑: पी॒यूषं॒ द्यौरदि॑ति॒रद्रि॑बर्हाः । उ॒क्थशु॑ष्मान्वृषभ॒रान्त्स्वप्न॑स॒स्ताँ आ॑दि॒त्याँ अनु॑ मदा स्व॒स्तये॑ ॥

English Transliteration

yebhyo mātā madhumat pinvate payaḥ pīyūṣaṁ dyaur aditir adribarhāḥ | ukthaśuṣmān vṛṣabharān svapnasas tām̐ ādityām̐ anu madā svastaye ||

Mantra Audio
Pad Path

येभ्यः॑ । मा॒ता । मधु॑ऽमत् । पिन्व॑ते । पयः॑ । पी॒यूष॑म् । द्यौः । अदि॑तिः । अद्रि॑ऽबर्हाः । उ॒क्थऽशु॑ष्मान् । वृ॒ष॒ऽभ॒रान् । स्वप्न॑सः । तान् । आ॒दि॒त्यान् । अनु॑ । म॒द॒ । स्व॒स्तये॑ ॥ १०.६३.३

Rigveda » Mandal:10» Sukta:63» Mantra:3 | Ashtak:8» Adhyay:2» Varga:3» Mantra:3 | Mandal:10» Anuvak:5» Mantra:3


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (येभ्यः) जिन विद्वानों के लिए (माता) जगत् की माता या जगत् का निर्माता परमात्मा (मधुमत् पयः पिन्वते) मधुर वेदज्ञान रस को सींचता है-देता है (अद्रिबर्हाः) प्रशंसाकर्ताओं को बढ़ानेवाला (अदितिः) अखण्डित (द्यौः) ज्ञानप्रकाशमान परमात्मा (पीयूषम्) अमृत मोक्षानन्द को सींचता है-देता है (तान्-उक्थशुष्मान्) उन वेदवाणीबलवालों को (आदित्यान्) अखण्डित ब्रह्मचर्यवाले विद्वानों को (स्वस्तये-अनुमद) कल्याण के लिए हर्षित कर तृप्त कर ॥३॥
Connotation: - ज्ञानप्रकाशमान जगत् का रचयिता परमात्मा जिन अखण्डित ब्रह्मचारियों को वेदज्ञान अमृत मोक्ष प्रदान करता है, उनको प्रत्येक प्रकार से अपने कल्याणार्थ तृप्त करना चाहिए ॥३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

माधुर्ययुक्त दुग्ध

Word-Meaning: - [१] (तान्) = उन (आदित्यान्) = सब स्थानों से अच्छाइयों का ग्रहण करनेवाले देवों के (अनु) = पीछे चलते हुए हम (मदा) = हर्ष का अनुभव करते हैं, जिससे (स्वस्तये) = [सु+अस्ति ] हम जीवन की स्थिति को उत्तम बना सकें। आदित्यों का अनुगमन करते हुए हम भी गुणों के आदान की वृत्तिवाले बनेंगे, तो हमारी स्थिति उत्तम बनेगी ही । [२] उन आदित्यों का हम अनुगमन करते हैं (येभ्यः) = जिनके लिये (माता) = वेद-माता (मधुमत् पयः) = माधुर्य से पूर्ण ज्ञानदुग्ध को (पिन्वते) = प्राप्त कराती है । 'स्तुता मया वरदा वेदमाता० ' इन वेद शब्दों में वेद को माता कहा ही है। माता जैसे दूध से बच्चे का पोषण करती है, इसी प्रकार यह वेदमाता ज्ञानदुग्ध से हमारा पोषण करती है । वेदमाता का यह ज्ञानदुग्ध माधुर्य से परिपूर्ण है। वेद में माधुर्य पर अत्यधिक बल दिया है। वेद का ज्ञान मनुष्य के जीवन को द्वेषादि से ऊपर उठाकर मधुर बनाता है। [३] हम उन देवों के सम्पर्क में आयें जिनके लिये (द्यौः) = द्युलोक, अर्थात् मस्तिष्क (पीयूषम्) = अमृत का वर्षण करता है । मस्तिष्कस्थ सहस्रार चक्र में जिस समय प्राणों का संयम होता है उस समय धर्ममेघ समाधि की स्थिति में अमृत बिन्दुवर्षण होता है जो कि योगी के अनिर्वचनीय आनन्द का कारण बनता है । (अदिति:) = हृदयान्तरिक्ष [अदितिरन्तरिक्षम् ] (अद्रिबर्हाः) = अविदारणीय [अ+दृ] अथवा आदरणीय प्रभु का वर्धन करनेवाला होता है। इन देवों के हृदय में प्रभु की भावना का उत्कर्ष होता है, यह प्रभु-दर्शन ही वस्तुतः इन्हें पवित्र व शान्त जीवनवाला बनाता है। [४] हम उन देवों के सम्पर्क में आयें जो (उक्थशुष्मान्) = स्तोत्रों के बलवाले हैं, प्रभु के स्तवन से प्रभु के सम्पर्क में आकर जो प्रभु के बल से बलवाले होते हैं। (वृषभरान्) = जो अपने अन्दर धर्म की भावना को भरते हैं तथा (स्वप्नस:) = [अप्रस्-कर्म] उत्तम कर्मवाले हैं। इन देवों के सम्पर्क में आकर हम भी 'स्तुतिशील, धार्मिक व उत्तम यज्ञादि कर्मों के करनेवाले' बनेंगे।
Connotation: - भावार्थ- हम उन देवों के सम्पर्क में आयें जो कि 'स्तुतिशील धार्मिक व कर्मनिष्ठ' हैं तथा जो वेदज्ञान को प्राप्त करते हैं, समाधि के अभ्यस्त हैं, प्रभु का हृदय में दर्शन करनेवाले हैं।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (येभ्यः) येभ्यो विद्वद्भ्यः (माता) जगन्माता परमात्मा (मधुमत् पयः पिन्वते) मधुरं वेदज्ञानरसम् “पयसा शब्दार्थसम्बन्धरसेन” [यजु० २०।४३ दयानन्दः] सिञ्चति-प्रयच्छति “पिवि सेचने” [भ्वादिः] (अद्रिबर्हाः-अदितिः-द्यौः पीयूषम्) प्रशंसाकर्तृवर्धकः “अद्रिरसि श्लोककृत्” [काठ० १।५] अखण्डितो ज्ञानप्रकाशमानः परमात्मा “द्यौः प्रकाशमानः परमात्मा” [ऋ० १।८९।१० दयानन्दः] अमृतं मोक्षानन्दम् “पीयूषम्-अमृतम्” [ऋ० ६।४७।४ दयानन्दः] सिञ्चति-प्रयच्छति (तान्-उक्थशुष्मान्) तान् वेदवाग्बलयुक्तान् (वृषभरान्) वृष्टियज्ञपूर्णान् मेघानिव ज्ञानामृत-रसपूर्णान् (स्वप्नसः) शुभकर्मवतः “अप्नः कर्मनाम” [निघ०  २।१] (आदित्यान्) अखण्डितब्रह्मचर्यवतो विदुषः (स्वस्तये अनुमद) कल्याणाय खल्वनुमोदय हर्षय तर्पय ॥३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Serve, exhilarate and replenish those Adityas, children of light on earth and brilliancies of nature for whom mother earth yields and augments honey sweets of the milk of life, the sun, mother infinity and the cloud bearing sky shower nectar sweets of rain. Be grateful and rejoice with those, Adityas, who bring the resonance of mantric power to yajna, who move the mighty clouds of rain and who perform the noblest creative acts for the good, happiness and all round well being of life.