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म॒ध्या यत्कर्त्व॒मभ॑वद॒भीके॒ कामं॑ कृण्वा॒ने पि॒तरि॑ युव॒त्याम् । म॒ना॒नग्रेतो॑ जहतुर्वि॒यन्ता॒ सानौ॒ निषि॑क्तं सुकृ॒तस्य॒ योनौ॑ ॥

English Transliteration

madhyā yat kartvam abhavad abhīke kāmaṁ kṛṇvāne pitari yuvatyām | manānag reto jahatur viyantā sānau niṣiktaṁ sukṛtasya yonau ||

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Pad Path

म॒ध्या । यत् । कर्त्व॑म् । अभ॑वत् । अ॒भीके॑ । काम॑म् । कृ॒ण्वा॒ने । पि॒तरि॑ । यु॒व॒त्याम् । म॒ना॒नक् । रेतः॑ । ज॒ह॒तुः॒ । वि॒ऽयन्ता॑ । सानौ॑ । निऽसि॑क्तम् । सु॒ऽकृ॒तस्य॑ । योनौ॑ ॥ १०.६१.६

Rigveda » Mandal:10» Sukta:61» Mantra:6 | Ashtak:8» Adhyay:1» Varga:27» Mantra:1 | Mandal:10» Anuvak:5» Mantra:6


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (यत् युवत्यां कर्त्वम्-अभवत्) जब कि युवती भार्या में पुत्रोत्पादन से कर्त्तव्य पूर्ण हो जाता है (पितरि कामं कृण्वाने-अभीके) जीवित पिता में-उसके आश्रय पुत्र का पुत्र उत्पादन की कामना हो जाने पर उसके सम्मुख (वियन्तौ मनानक्-रेतः-जहतुः) विशिष्टता से प्राप्त होते हुए पति पत्नी अल्प सन्तानों को तो त्याग दें-उत्पन्न करें (सुकृतस्य योनौ सानौ निषक्तम्) पुण्यकर्म के अर्थात् पितृ-ऋण के प्रतीकार हो जाने पर गृहाश्रम में विशेष सेवन करने योग्य जगत् में निषेक करना कर्त्तव्य होता है ॥६॥
Connotation: - युवती भार्या में पुत्रोत्पादन के लिए वीर्यनिषेक करना कर्त्तव्य होता है। जीवित पिता के होते हुए कम से कम प्रजा तो अवश्य उत्पन्न करे। इसके लिए गृहस्थ आश्रम पुण्य का स्थान है। विशेष सेवनीय जगत् में सन्तानपरम्परा के लिए निषेक करना आवश्यक है। यह गृहस्थाश्रम की परम्परा है ॥६॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सभा-भंग व नये चुनाव के समय शक्ति कहाँ ?

Word-Meaning: - [१] (यत्) = जो (कर्तं मध्या अभवत्) = अपने कार्य के बीच में ही होती है, अर्थात् सभी किन्हीं कानूनों पर विचार कर रही हो वह विचार पूर्ण न हुआ हो तो भी (अभीके) = [at the right time, just in time] ठीक समय पर, अर्थात् सभा के समय की अवधि के समाप्त होने पर (पितरि) = राष्ट्र के पिता [= रक्षक] राजा के (युवत्याम्) = उस युवति सभा में (कामं कृण्वाने) = अपनी सभाभंग रूप इच्छा को करने पर, ये (वियन्ता) = भंग होती हुई सभाएँ [ सभा व समिति ] (रेतः) = शक्ति को (मनानक्) = थोड़ा-सा थोड़ी देर के लिये (जहतुः) = छोड़ देती हैं । [२] इस चुनाव के काल में यह शक्ति (सानौ) = शिकर में राष्ट्र के सर्वोच्च व्यक्ति राष्ट्रपति में (निषिक्तम्) = सिक्त होती है, जो राष्ट्रपति (सुकृतस्य योनौ) = सुकृत का योनि है, सदा उत्तम ही कार्यों का करनेवाला है, जिससे यही आशा की जाती है कि वह गलत कार्य कर ही नहीं सकता [ a king can do no wrors] [३] सभा को यहां युवति कहा गया है। वस्तुतः प्रति चतुर्थ या पंचम वर्ष में फिर से चुनाव हो जाने के कारण सभा के वृद्ध हो जाने का प्रश्न ही नहीं होता। यह सदा युवति बनी रहती है । राष्ट्रपति चुनाव कराता है सो वह इस युवति का पिता कहा गया है। इस युवति में ही वह पिता शक्ति का स्थापन कर देता है, सभा ही तो राष्ट्र का संचालन करती है। चुनाव के अल्पकाल में यह शक्ति फिर से उस पिता में, जो कि राष्ट्र रूप गृह में सर्वोच्च व्यक्ति है, और जिससे यह आशा की जाती है कि वह जो कुछ करेगा ठीक ही करेगा, स्थापित होती है । [४] यहाँ यह संकेत स्पष्ट है कि चुनाव सभा व मन्त्रिमण्डल नहीं कराते । उनका भंग होकर राष्ट्रपति ही चुनाव की व्यवस्था करता है ।
Connotation: - भावार्थ- चुनाव ठीक समय पर हो ही जाने चाहिएँ। सभा का कोई कार्य अधूरा भी हो तो सभाभंग होकर नया चुनाव हो ही जाना चाहिए, नयी सभा उस कार्य को पूर्ण कर लेगी। चुनाव के समय सारी शक्ति राष्ट्रपति में निहित होनी चाहिए।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (यत् युवत्यां कर्त्वम्-अभवत्) यदा युवत्यां भार्यायां पुत्रोत्पादनकर्त्तव्यं पूर्णं भवति (पितरि कामं कृण्वाने-अभीके) जीवति पितरि तदाश्रमे पुत्रस्य पुत्रोत्पादनं कामं कुर्वति सति तत्सम्मुखे (वियन्तौ मनानक्-रेतः-जहतुः) विशिष्टतया प्राप्नुवन्तौ पतिपत्न्यौ-अल्पाः प्रजास्तु त्यजताम् “रेतः प्रजाः” [ऐ० आ० २।१।३] सुकृतस्य योनौ (सानौ निषक्तम्) पुण्यकर्मणः पितृणस्य प्रतीकाराय गृहे गृहाश्रमे विभक्ते जगति निषक्तं निषेचनीयं कर्त्तव्यं भवति “सानौ विभक्ते जगति” [ऋ० १।१४६।२ दयानन्दः] ॥६॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - When the generator, father, and the youthful maiden, the mother, both joined in love and marriage with the desire to fulfil their obligation to Prajapati, lord of the household, have begot and brought up the progeny and have fulfilled their obligation in common, they give up and retire. All this, love, desire, accomplishment and fulfilment, is an extension of the process of divine creativity initiated on top of heaven at the centre of cosmic generation.