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इन्द्र॑ क्ष॒त्रास॑मातिषु॒ रथ॑प्रोष्ठेषु धारय । दि॒वी॑व॒ सूर्यं॑ दृ॒शे ॥

English Transliteration

indra kṣatrāsamātiṣu rathaproṣṭheṣu dhāraya | divīva sūryaṁ dṛśe ||

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Pad Path

इन्द्र॑ । क्ष॒त्रा । अस॑मातिषु । रथ॑ऽप्रोष्ठेषु । धा॒र॒य॒ । दि॒विऽइ॑व । सूर्य॑म् । दृ॒शे ॥ १०.६०.५

Rigveda » Mandal:10» Sukta:60» Mantra:5 | Ashtak:8» Adhyay:1» Varga:24» Mantra:5 | Mandal:10» Anuvak:4» Mantra:5


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (इन्द्र) हे शासक ! (रथप्रोष्ठेषु-असमातिषु) रथप्रोष्ठ-रथ के संचालन में प्रोष्ठ-प्रौढ़-कुशल, असमान गति प्रवृत्तिवाले अधिकारी में (क्षत्रा धारय) बलों को समर्पित कर (दिवि-इव सूर्यं दृशे) जैसे आकाश में सूर्य को-जगत् को प्रकाशित करने के लिए परमात्मा धारण करता है ॥५॥
Connotation: - महारथी युद्धकुशल के अधीन अपने विविध सैन्य बलों को समर्पित करे-सौंपे, जैसे परमात्मा ने आकाश के अन्दर सब जगत् को प्रकाशित करने के लिए धारण कर रखा है ॥५॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

रथ-प्रोष्ठ 'असमाति'

Word-Meaning: - [१] हे (इन्द्र) = सर्वशक्तिमन् प्रभो ! आप (रथप्रोष्ठेषु) = [प्रोष्ठ= ऋषभ - श्रेष्ठ] रंहणशील- गतिशील- स्फूर्तिमय पुरुषों में श्रेष्ठ (असमातिषु) = अनुपम जीवनवाले इन पुरुषों में (क्षत्रा) = बलों को (धारय) = धारण करिये। इस प्रकार धारण करिये, (इव) = जैसे कि (दिवि) = द्युलोक में (सूर्यम्) = आप सूर्य को धारण करते हैं, (दृशे) = जिससे सब लोग मार्ग को देख सकें। [२] 'रथ' शब्द 'रंहतेर्गतिकर्मणः ' धातु से बनकर तीव्र गतिवाले, स्फूर्तिमय जीवनवाले पुरुष का वाचक है। उनमें भी श्रेष्ठ 'रथ-प्रोष्ठ' है । यह इस स्फूर्ति व गति के कारण ही 'असमाति' बना है, अनुपम जीवनवाला हुआ है। इसके जीवन में शक्ति का स्थापन होगा तो ये लोकहित के कार्यों को करने में अधिक क्षम होंगे, ये उसी प्रकार लोगों के मार्ग-दर्शन के लिये होंगे जिस प्रकार कि आकाश में उदित हुआ हुआ सूर्य लोगों का मार्गदर्शन करता है ।
Connotation: - भावार्थ-स्फूर्तिमय जीवनवाले, कामादि के विजेता अनुपम जीवनवाले पुरुष हमारे लिये मार्ग-दर्शन करनेवाले हों ।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (इन्द्र) हे शासक ! (रथप्रोष्ठेषु असमातिषु) रथयानस्य चालने प्रोष्ठाः-प्रौढाः, ये ते रथप्रोष्ठाः “प्रोष्ठे प्रौढे” [ऋ० ७।५५।८ दयानन्दः] ‘आदरार्थं बहुवचनम्’ रथचालनप्रोढे-असुमातौ-असमानगतिप्रवृत्तिके-अधिकारिणि (क्षत्रा धारय) बलानि स्थापय (दिवि-इव सूर्यं दृशे) यथा ह्याकाशे सूर्यं जगद्द्रष्टुं परमात्मा धारयति ॥५॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, lord of light and law, ruler of the world, first among exceptional equals of the chariot commanders of the world, pray hold and rule the order of the commonwealth of humanity as the lord supreme holds the sun in heaven for all the worlds to see.