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मनो॒ न्वा हु॑वामहे नाराशं॒सेन॒ सोमे॑न । पि॒तॄ॒णां च॒ मन्म॑भिः ॥

English Transliteration

mano nv ā huvāmahe nārāśaṁsena somena | pitṝṇāṁ ca manmabhiḥ ||

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Pad Path

मनः॑ । नु । आ । हु॒वा॒म॒हे॒ । ना॒रा॒शं॒सेन॑ । सोमे॑न । पि॒तॄ॒णाम् । च॒ । मन्म॑ऽभिः ॥ १०.५७.३

Rigveda » Mandal:10» Sukta:57» Mantra:3 | Ashtak:8» Adhyay:1» Varga:19» Mantra:3 | Mandal:10» Anuvak:4» Mantra:3


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (नाराशंसेन सोमेन) मनुष्यों की प्रशंसा करनेवाले वेदज्ञान के द्वारा, तथा (पितॄणां मन्मभिः-च) पालक ऋषियों के मननीय विचारों-अनुभवों से (मनः-नु-आ हुवामहे) मन-अन्तःकरण को शीघ्र अच्छा बनावें ॥३॥
Connotation: - मनुष्यों के व्यवहार को बतानेवाले परमात्मा से प्रकाशित वेदज्ञान द्वारा तथा पालक ऋषियों के अनुभवों द्वारा मानसिक स्तर को ऊँचा बनाना चाहिए ॥३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सोम और मन्म

Word-Meaning: - [१] (नु) = अब हम (मन्म) = मन को (आहुवामहे) = सब ओर से पुकारते हैं । उस मन को, जो नाना विषयों के अन्दर भटकता है, हम उसे विषयों में भटकने से लौटाते हैं । [२] इसलिए लौटाते हैं कि नाराशंसेन सोमेन मनुष्यों से (आशंसनीय) = [ चाहने योग्य] सोम को हम अपने शरीर में सुरक्षित कर सकें। सोम शक्ति शरीर की मूलभूत शक्ति है। मन के संयम से इसका संयम होता है, मन के विषयों में जाने से इसका अपव्यय होता है । (च) = और मन को इसलिए भी विषयों से हम लौटाते हैं कि (पितॄणाम्) = पितरों के (मन्मभिः) = ज्ञानपूर्व उच्चारण किये गये स्तोत्रों का हम भी उच्चारण करनेवाले बनें। मनोनिरोध के बिना पहले तो प्रभु स्तवन का सम्भव ही नहीं, पर यदि जैसे तैसे कुछ स्तोत्रों का हम उच्चारण करें भी तो मन अन्यत्र होने से वे स्तोत्र ज्ञानपूर्वक उच्चारित न हो रहे होंगे। एवं मन को विषयों से वापिस पुकारकर शरीर में ही निरुद्ध करने के दो लाभ हैं [क] शरीर में शक्ति का रक्षण, [ख] और ज्ञानपूर्वक प्रभु का स्तवन । [३] ज्ञानपूर्वक स्तोत्रों के उच्चारण से ही वस्तुतः पितर 'पितर' बनते हैं। इन स्तोत्रों का परिणाम 'जीवन की पवित्रता' होता है। स्तोत्र इन्हें आसुरवृत्तियों के आक्रमण से बचाते हैं [पा रक्षणे] एवं स्तोत्रों द्वारा अपना रक्षण करनेवाले ये पितर हैं।
Connotation: - भावार्थ-मन को हम विषयों से रोकें इससे शक्ति का रक्षण होगा और प्रभु का हम ज्ञानपूर्वक स्तवन कर पायेंगे ।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (नाराशंसेन सोमेन) नराणां प्रशंसाकारकेण परमात्मज्ञानेन वेदेन “येन नराः प्रशस्यन्ते स नाराशंसः” [निरु० ९।१०] तथा (पितॄणां मन्मभिः-च) पालकर्षीणां च मननीयैर्ज्ञानैरनुभवैश्च (मनः नु-आ हुवामहे) मनोऽन्तःकरणं शीघ्रं सुसम्पादयामः ॥३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - We invoke the mind, alert ourselves and, with songs of human approbation and celebration, join with the thoughts and wisdom of our parents and ancestors to maintain the thread of continuity.