Word-Meaning: - [१] (अद्य) = आज (महताम्) = महान्, पूजा के योग्य (बृहताम्) = शरीर, मन व मस्तिष्क के दृष्टिकोण से वृद्धि को प्राप्त (अनर्वणाम्) = हिंसा की वृत्ति से रहित (देवानाम्) = देवों के (महत् अवः) = महनीय रक्षण का (आवृणीमहे) = वरण करते हैं (यथा) = जिससे कि (वीरजातम्) = वीरों के जन्म देनेवाले (वसु) = धन को (नशामहै) = हम प्राप्त करें। [२] देवों के लक्षणों में प्रथम लक्षण है 'महतां', देव महान् होते हैं, विशाल हृदयवाले होते हैं। दूसरा लक्ष्ण 'बृहतां' शब्द से सूचित हुआ है। ये 'बृहि वृद्धौ' शरीर, मन व मस्तिष्क के दृष्टिकोण से उन्नत होते हैं। तीसरा लक्षण 'अनर्वणाम्' शब्द से कहा गया है, ये हिंसा की वृत्ति से दूर होते हैं । [३] इन देवताओं के सम्पर्क में हमारा जीवन भी इसी प्रकार का बनेगा और इस प्रकार हम अपने जीवन में उस (वसु) = धन को प्राप्त करेंगे जो हमें वीर बनानेवाला होगा। [४] इस प्रकार वसु का सम्पादन करते हुए हम (अद्या) = आज (देवानाम्) = देवों (तद् अवः) = उस रक्षण का (वृणीमहे) = वरण करते हैं। हम अपने जीवनों में दिव्यता को सुरक्षित करने के लिये यत्नशील होते हैं।
Connotation: - भावार्थ - देव 'महान् बृहत् व अनर्वा' हैं। हमें इनका रक्षण प्राप्त हो ।