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आ नि॑वर्त॒ नि व॑र्तय॒ पुन॑र्न इन्द्र॒ गा दे॑हि । जी॒वाभि॑र्भुनजामहै ॥

English Transliteration

ā nivarta ni vartaya punar na indra gā dehi | jīvābhir bhunajāmahai ||

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Pad Path

आ । नि॒ऽव॒र्त॒ । नि । व॒र्त॒य॒ । पुनः॑ । नः॒ । इ॒न्द्र॒ । गाः । दे॒हि॒ । जी॒वाभिः॑ । भु॒न॒जा॒म॒है॒ ॥ १०.१९.६

Rigveda » Mandal:10» Sukta:19» Mantra:6 | Ashtak:7» Adhyay:7» Varga:1» Mantra:6 | Mandal:10» Anuvak:2» Mantra:6


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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (इन्द्र-आ निवर्त) हे हमारी ओर अभिमुख होनेवाले ऐश्वर्यशाली परमात्मन् ! (निवर्तय) हमारे अभिमुख हो (नः पुनः-गाः-देहि) हमारे लिए पुनः-पुनः और पुनर्जन्म में भी गौवों, प्रजाओं, इन्द्रियों को दे (जीवाभिः भुनजामहै) हम जीती हुई, स्वस्थ रहती हुई गौवों, प्रजाओं, इन्द्रियों के द्वारा भोग को प्राप्त हों ॥६॥
Connotation: - परमात्मा हमें गौवों, प्रजाओं, इन्द्रियों को प्रदान करे, जिससे हम उनके सम्बन्ध से भोगों को प्राप्त करें ॥६॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

जीवित इन्द्रियरूपी गौवें

Word-Meaning: - [१] हे (इन्द्र) = सब शत्रुओं का विद्रावण करनेवाले प्रभो ! (आनिवर्त) = आप हमारी और लौटिये । आपकी कृपादृष्टि हमारे पर हो। और आप (निवर्तय) = हमारी इन इन्द्रियों को विषयों से लौटानेवाले होइये । और इस प्रकार हे प्रभो ! आप (नः) = हमें (पुनः) = फिर (गाः) = इन इन्द्रियरूप गौओं को (देहि) = प्राप्त कराइये। [२] आपकी कृपा से हम (जीवाभिः) = जीवन से युक्त इन इन्द्रियों से (भुनजामहै) = अपना पालन करनेवाले बनें। ये इन्द्रियाँ विषयों की ओर जाकर, उनका तत्त्वज्ञान प्राप्त करके उनका उचित उपयोग करती हुई सशक्त बनती है और इन जीवित इन्द्रियों से हम जीवनयात्रा में आगे बढ़ते हुए अपना रक्षण करते हैं । परन्तु ये ही इन्द्रियाँ यदि विषयों में जाकर फिर वहाँ से लौटें नहीं, और उन विषयों से बद्ध होकर उनका शिकार हो जायें तो इन मृत इन्द्रियों से हमने क्या उन्नति करनी ? [३] जैसे गौवों का चारागाह में जाना आवश्यक होता है, इस वायुसेवन के बिना उनके दूध में गुण उत्पन्न नहीं होता। इसी प्रकार इन इन्द्रियों का विषयों में जाना आवश्यक है, अन्यथा ये ज्ञान को कैसे प्राप्त करेंगी ? गौवों का जैसे चारागाह से लौटना आवश्यक होता है उसी प्रकार इन इन्द्रियों का भी लौटना आवश्यक है। गौवों का अधिष्ठता ग्वाला अप्रमत्त होकर इस आने-जाने में उनका रक्षण करता है, इसी प्रकार यहाँ इन इन्द्रियरूप गौवों का गोप यह आत्मा है। आत्मा के क्षणिक प्रमाद से ये इन्द्रियरूप गौवें विषय सिंह से आक्रान्त हो जाती हैं। यही उनका मरण हो जाता है। हम तो प्रभु कृपा से जीवित इन्द्रियों के द्वारा अपना रक्षण करनेवाले बनें ।
Connotation: - भावार्थ - प्रभु कृपा से हमारी इन्द्रियाँ विषयों का ग्रहण करती हुईं, उनका शिकार न हो जाएँ। ये जीवित इन्द्रियाँ हमारी यात्रा पूर्ति का साधन बनें ।
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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (इन्द्र-आ निवर्त) हे-अस्मदभिमुखीभवितः-ऐश्वर्यवन् परमात्मन् ! (निवर्तय) अस्मदभिमुखी भव (नः पुनः-गाः-देहि)  अस्मभ्यं पुनः पुनः-पुनर्जन्मनि वा गाः प्रजाः, इन्द्रियाणि वा देहि (जीवाभिः-भुनजामहै) जीवयन्तीभिर्जीवनं प्रयच्छन्तीभिर्वयं भोगं प्राप्नुयाम ॥६॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, ruler and controller of life and the world, come, come constantly, keep life constantly in motion, give us the wealth and energy of life again and again. Pray let us enjoy life with living wealth, bubbling energy and creative ambition.