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उ॒रू॒ण॒साव॑सु॒तृपा॑ उदुम्ब॒लौ य॒मस्य॑ दू॒तौ च॑रतो॒ जनाँ॒ अनु॑ । ताव॒स्मभ्यं॑ दृ॒शये॒ सूर्या॑य॒ पुन॑र्दाता॒मसु॑म॒द्येह भ॒द्रम् ॥

English Transliteration

urūṇasāv asutṛpā udumbalau yamasya dūtau carato janām̐ anu | tāv asmabhyaṁ dṛśaye sūryāya punar dātām asum adyeha bhadram ||

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Pad Path

उ॒रु॒ऽन॒सौ । अ॒सु॒ऽतृपौ॑ । उ॒दु॒म्ब॒लौ । य॒मस्य॑ । दू॒तौ । च॒र॒तः॒ । जना॑न् । अनु॑ । तौ । अ॒स्मभ्य॑म् । दृ॒शये॑ । सूर्या॑य । पुनः॑ । दा॒ता॒म् । असु॑म् । अ॒द्य । इ॒ह । भ॒द्रम् ॥ १०.१४.१२

Rigveda » Mandal:10» Sukta:14» Mantra:12 | Ashtak:7» Adhyay:6» Varga:16» Mantra:2 | Mandal:10» Anuvak:1» Mantra:12


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (यमस्य दूतौ-उरूणसौ-असुतृपौ-उदुम्बलौ जनान्-अनु चरतः) वे दिन और रात काल के दूत बने हुए बड़े कुटिल कठोर स्वभाव के, प्राणों से तृप्त होनेवाले महाबली (यह आलङ्कारिक कथन है) उत्पन्न हुए सभी जीवों में साथ-साथ चलते हैं (इह-अस्मम्यं भद्रम्-असु पुनः-दाताम्) वे दिन और रात बारम्बार सूर्यदर्शन के लिये आज इस लोक में हमारे लिये सुखदायक जीवनधारण करने को दूसरा जन्म फिर देवें ॥१२॥
Connotation: - दिन और रात आयुरूप जीवनकाल के दूत बन कर बारम्बार सूर्यदर्शन कराते हुए जीव को अन्तिम काल तक ले जाते हैं एवं पुनर्जन्म भी धारण कराते हैं ॥१२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

भद्र असु' = उत्तम जीवन

Word-Meaning: - [१] गत मन्त्रों में वर्णित काम-क्रोध (उरूणसौ) = बड़ी नाक वाले हैं। सेवन से ये बढ़ते ही जाते हैं। (अ-सु-तृपौ) = ये कभी अच्छी तरह तृप्त हो जाएँ, सो बात नहीं है। 'भूय एवाभिवर्धते’=ये तो उत्तरोत्तर बढ़ते ही चलते हैं। (उदुम्बलौ) [उद् बलौ] = अत्यन्त प्रबल हैं। इनको जीतना सुगम नहीं है। और अपराजित हुए हुए ये (यमस्य दूतौ) = यम के दूत हैं, हमें मृत्यु के समीप ले जाते हैं। ये दोनों दूत (जना अनु चरतः) = सदा मनुष्यों के पीछे चलते हैं । अर्थात् ये हमारे अन्दर स्वाभाविक रूप से रखे हुए हैं । [२] अब यदि ये प्रबल हो जाएँ तो ये हमें समाप्त कर देते हैं, और यदि हम प्रबल बनकर इनको अपने वश में रखें तो ये हमारे सेवक होते हैं और हमारा कल्याण करनेवाले बन जाते हैं। प्रबल जीवित रूप में ये हमें सोने की [gold] तरह समाप्त करनेवाले होते हैं। तथा भस्मीभूत हुए हुए ये स्वर्णभस्म की तरह हमारे जीवन का कारण बनते हैं । सो हम इन्हें ज्ञानचक्षु से भस्मीभूत करनेवाले हों जिससे (तौ) = ये काम व क्रोध (अस्मभ्यम्) = हमारे लिये (पुनः) = फिर (अद्य) = आज (इह) = यहाँ (भद्रं असुम्) = शुभ जीवन को (दाताम्) = प्राप्त कराएँ और हम (दृशये सूर्याय) = दीर्घकाल तक सूर्य दर्शन करनेवाले व दीर्घजीवी हो सकें। गत मन्त्र के अनुसार स्वस्ति व अनमीव को प्राप्त करके पूर्ण शतवर्ष के जीवन वाले हों ।
Connotation: - भावार्थ- काम-क्रोध अत्यन्त प्रबल हैं, परन्तु हमारे लिये तो ये वशीभूत हुए हुए भद्र जीवन को दें जिससे हम दीर्घकाल तक सूर्य दर्शन करनेवाले बनें।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (यमस्य दूतौ उरूणसौ-असुतृपौ-उदुम्बलौ जनान्-अनु चरतः) यमस्य दूतौ महाकुटिलौ [णस कौटिल्ये भ्वादि०] ततोऽच् असुतृपौ-प्राणैस्तृप्यन्तौ, इत्यालङ्कारिकत्वम्, उरुबलौ महाबलौ जनान्-जायमानानुत्पद्यमानाननु चरतो गतिं कुरुतः (तौ सूर्याय दृशये-अद्य-इह-अस्मभ्यं भद्रम्-असुं पुनः-दाताम्) तावहोरात्रौ सूर्याय दृशये पुनः पुनः सूर्यं दर्शयितुमद्येहास्मिन् लोकेऽस्मभ्यं सुखकरं प्राणं परजन्म धारयितुं पुनर्दत्तः ॥१२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Those two night and day are the most perceptive, abundant and alert, mighty strong and relentless watch dogs of time immediately close ahead and on the heels of people. Let them now again give us happiness and well being full of bubbling energy so that we may see the light of the sun anew, giver of life and enlightenment.