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आप॒ इद्वा उ॑ भेष॒जीरापो॑ अमीव॒चात॑नीः । आप॒: सर्व॑स्य भेष॒जीस्तास्ते॑ कृण्वन्तु भेष॒जम् ॥

English Transliteration

āpa id vā u bheṣajīr āpo amīvacātanīḥ | āpaḥ sarvasya bheṣajīs tās te kṛṇvantu bheṣajam ||

Mantra Audio
Pad Path

आपः॑ । इत् । वा॒ । ऊँ॒ इति॑ । भे॒ष॒जीः । आपः । अ॒मी॒व॒ऽचात॑नीः । आपः॑ । सर्व॑स्य । भे॒ष॒जीः । ताः । ते॒ । कृ॒ण्व॒न्तु॒ । भे॒ष॒जम् ॥ १०.१३७.६

Rigveda » Mandal:10» Sukta:137» Mantra:6 | Ashtak:8» Adhyay:7» Varga:25» Mantra:6 | Mandal:10» Anuvak:11» Mantra:6


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (आपः) जल (इत्-वै-उ) ही निश्चय से (भेषजीः) स्नान पान के द्वारा स्वास्थ्यकर हैं (आपः) जल (अमीवचातनीः) रोगनाशक हैं (आपः सर्वस्य भेषजीः) जल सबकी भेषज हैं (ताः-ते भेषजं कृण्वन्तु) वे जल तेरे लिये स्वास्थ्य करें ॥६॥
Connotation: - जल स्नान और पान के द्वारा सब रोगों के ओषध हैं, स्वास्थ्यकर रसायनरूप हैं ॥६॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सर्वदोष हर 'आप' [जल]

Word-Meaning: - [१] (आप:) = जल (इद वा उ) = निश्चय से (भेषजी:) = औषध हैं। ये (आपः) = जल (अमीव- चातनी:) = रोगों का विनाश करनेवाले हैं। (आप:) = जल (सर्वस्य भेषजी:) = सब रोगों के औषध हैं। (ता) = वे जल (ते) = तेरे लिए (भेषजं कृण्वन्तु) = औषध को करें। [२] जल को उबालने से सोलह ग्राम जल का पन्द्रह ग्राम रह जाए तो इस उबले हुए जल में शक्ति द्विगुणित हो जाती है। चौदह ग्राम रह जाने पर यह शक्ति चौगुणी हो जाती है और तेरह ग्राम रह गया जल नवगुण शक्तिवाला हो जाता है। वस्तुतः वह जल [जल घातने] सब रोगों का घात करनेवाला है ।
Connotation: - भावार्थ- जल के अन्दर सब औषध हैं। ये जल मनुष्य को नीरोग बनाते हैं । सूचना – [क] प्रातः काल का जलपान, [ख] भोजन में बीच-बीच में थोड़ा-थोड़ा पानी पीना, [ग] पीने के लिए गरम [विशेषतः सर्दी में] स्नान के लिए ठण्डा पानी लेना [सादा], [घ] जब भी पीना धीमे-धीमे पीना। ये बातें बड़ी उपयोगी सिद्ध होंगी।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (आपः-इत् वै-उ-भेषजीः) जलानि स्नानपानाभ्यां स्वास्थ्यकराणि सन्तु (आपः-अमीवचातनीः) जलानि रोगनाशकानि “चातयतिर्नाशने” [निरु० ६।३०] (आपः सर्वस्य भेषजीः) जलानि सर्वस्य रोगस्य भेषजानि (ताः ते भेषजं कृण्वन्तु) तानि जलानि तुभ्यं भेषजं स्वास्थ्यं कुर्वन्तु ॥६॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - All waters and other liquid energies are sanatives. Waters are cleansers and destroyers of disease and sickness. Waters are medicaments for all living beings. O man, O sufferer, let the waters cure and wash you clean as natural medicine.