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तद्धि व॒यं वृ॑णी॒महे॒ वरु॑ण॒ मित्रार्य॑मन् । येना॒ निरंह॑सो यू॒यं पा॒थ ने॒था च॒ मर्त्य॒मति॒ द्विष॑: ॥

English Transliteration

tad dhi vayaṁ vṛṇīmahe varuṇa mitrāryaman | yenā nir aṁhaso yūyam pātha nethā ca martyam ati dviṣaḥ ||

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Pad Path

तत् । हि । व॒यम् । वृ॒णी॒महे॑ । वरु॑ण । मित्र॑ । अर्य॑मन् । येन॑ । निः । अंह॑सः । यू॒यम् । पा॒थ । ने॒थ । च॒ । मर्त्य॑म् । अति॑ । द्विषः॑ ॥ १०.१२६.२

Rigveda » Mandal:10» Sukta:126» Mantra:2 | Ashtak:8» Adhyay:7» Varga:13» Mantra:2 | Mandal:10» Anuvak:10» Mantra:2


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (वरुण मित्र-अर्यमन्) पूर्वोक्त हे वरुण ! मित्र ! अर्यमन् ! (वयम्) हम (तत्-हि) उस ही रक्षण को (वृणीमहे) चाहते हैं-वरते हैं (येन) जिस रक्षण से (यूयम्) तुम (मर्त्यम्) मनुष्य को (अंहसः) पाप कर्म से (नि पाथ) निश्चित रक्षा करते हो-करो (द्विषः-अति) द्वेष करनेवाले विरोधियों को अतिक्रमण करके हटाकर (च) तथा (नेथ) अभीष्ट तक ले जाओ ॥२॥
Connotation: - मनुष्य को चाहिये कि अध्यापक आदि चेतन देवों और सूर्य आदि जड़ देवों के अनुकूल सेवन से जीवनयात्रा ऐसे करनी चाहिए, जिससे पाप से बच सकें और अपना अभीष्ट साध सकें ॥२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

काम-क्रोध-लोभ से दूर

Word-Meaning: - [१] हे (वरुण-मित्र -अर्यमन्) = द्वेष का निवारण करनेवाले, स्नेहवाले, काम आदि का नियमन करनेवाले देवो ! (वयम्) = हम (हि) = निश्चय से (तद् वृणीमहे) = वही चाहते हैं (येन) = जिससे (यूयम्) = आप (मर्त्यम्) = मुझ मनुष्य को (अंहसः) = पाप व कुटिलता से (निःपाथ) = पार करके रक्षित करते हो, (च) = और (द्विषः) = द्वेष की भावनाओं से (अतिनेथ) = पार ले जाते हो । [२] 'मित्र' हमें सबके साथ स्नेह कराता हुआ 'काम' से ऊपर उठाता है। 'वरुण' हमें द्वेष से दूर करता हुआ क्रोध से रहित करता है । (अर्यमा) = हमें दानवृत्तिवाला बनाता हुआ लोभ से दूर करता है । इस प्रकार हम 'काम-क्रोध-लोभ' से ऊपर उठ जाते हैं। |
Connotation: - भावार्थ - 'मित्र, वरुण व अर्यमा' हमें 'काम-क्रोध-लोभ' से दूर करें ।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (वरुण मित्र-अर्यमन्) हे पूर्वोक्त वरुण ! मित्र ! अर्यमन् ! (वयं तत्-हि वृणीमहे) वयं तदेव रक्षणं वृणुयामः (येन) येन रक्षणेन (यूयम्-मर्त्यम्-अंहसः-निः पाथ) यूयं जनं पापकर्मणः-निश्चितं रक्षथ (द्विषः-अति) द्वेष्टॄन् विरोधिनोऽतिक्रम्य परास्य (च) तथा (नेथ) नयथ ॥२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O Mitra, Varuna and Aryama, divinities of love, justice and rectitude within and without in society, nature and beyond, that protection and guidance of yours we seek of you, yourself all beyond sin and evil. Save the mortals from sins and lead them to success and fulfilment across and beyond hate, jealousy, enmity and all negativity.